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Showing posts from November, 2022

वर्षों से जेलों में बिना दोष सिद्ध हुए बंद लोग

भारत की जेलों में दो तरह के बंद लोग हैं - एक तो वे लोग हैं जिन्हें सही या गलत किसी न्यायलय से कुछ वर्षों के क़ैद होने की सज़ा सुनाई गयी है तो यह लोग क़ैद की अवधि पूर्ण होने पर रिहा कर दिए जाएंगे। यह लोग सिद्ध दोष बंदी या कन्विक्ट कहलाते हैं। लेकिन जेलों में अधिकाँश वे लोग हैं जिनको किसी अदालत से चार्ज शीट ही नहीं मिली या वे लोग हैं जिनकी सुनवाई की तिथि निर्धारित होती है ट्रकों में भर कर न्यायलय ले जाए जाते हैं और उन्हें फिर अगली तारीख दे दी जाती है - यह विचाराधीन बंदी या अंडर ट्रायल प्रिज़नर कहे जाते हैं। लाखों ऐसे लोग वर्षों से जेलों में बंद हैं। पुलिस को शासन कसता रहता है तो पुलिस अनेक लोगों को आवारा घूमने के जुर्म में बंद कर देती है। अनेकों लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त होते हैं। अनेक लोग किसी पुलिस वाले से भिड़ जाते हैं और पुलिस वाला उनके पास चाकू आदि दिखा कर असलह एक्ट में बंद कर देता है। कोई आतंकवादी घटना होने पर एक विशेष वेश भूषा के लोग बंद कर दिए जाते हैं। अनेक लोगों का कोई अपना ऐसा नहीं होता है जो उसे बचाने छुड़ाने की कोशिश करे। गाँव के रहने वाले स्लम्स के रहने वाले गरीब अनपढ़ मे...

सभ्यता का सफ़र - 5

हम सबको चाहिए एक नया नाम रखें - अपना नाम + अपनी माता का नाम + अपने पिता का नाम बस। हम एक क़दम और बढ़ सकते हैं और इस नाम से vowels निकाल कर पुन : a e i o u के कर्म में vowels डाल दें और इस तरह न धर्म न जाति। मेरा नाम नेट पर यही है manesiro shaheri maretizo जन दिवस - दुनिया भर में एक दिन ! सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं। इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है ! इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है। दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है...

सभ्यता का सफ़र - 4

दुनिया में इस समय 195 देश हैं लेकिन सभी देशों में जो सरकारें बनती हैं वे मानवता के उच्च आदर्शों के विरुद्ध काम करती हैं जिन देशों में तानाशाही है या सैनिक शासन है या राजशाही है वहाँ मानव अधिकारों का हनन हो तो सम्भव लगता है लेकिन जो देश अपने को प्रजातंत्र कहते हैं वहाँ पर जनता के अधिकारों का हनन हो तो इसको समझने की ज़रूरत है। हर वर्ष एमनेस्टी इंटरनेशनल हर देश के बारे में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है जिससे मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानकारी मिलती है। अधिकाँश खुशहाल लोगों की ज़िन्दगी का लक्ष्य धन संपत्ति और सत्ता है। हर इंसान जानता है कि उसे एक दिन मरना है और वह चाहे कितना ही धन संपत्ति और सत्ता प्राप्त कर ले एक दिन छुटनी है। जब दुनिया में इतनी खुशहाली नहीं थी और आज जैसा सुख और वैभव से आम इंसान अनभिज्ञ था तो उसे सादगी पसंद थी और बहुत से लोग सीधी सादी रूखी सूखी ज़िंदगी से संतुष्ट थे। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के विकास के साथ दुनिया में चकाचौंध हो गयी - बड़े शानदार मकान , बड़ी शानदार गाड़ियां , बड़े मंहगे होटल , एयरपोर्ट , हवाई सफर , फैशनेबुल स्मार्ट युवतियां युवक और कुछ लोग बड़ी बड़ी ...

सभ्यता का सफ़र - 3

इसी बीच कुछ नशीले पदार्थों की और कुछ मनोरंजन की भी खोज हो गयी तो पुरुषों की एक आबादी काम नहीं करना चाहती थी और चालाक साज़िशी थी - लगभग 5 प्रतिशत - आज भी यही स्थिति है। इन लोगों ने धीरे धीरे नारी सत्ता के विरुद्ध दुष्प्रचार शुरू किया। एक दिन उस समय की रानी मां और उसकी सहेलियों ने स्वयं सत्ता को त्याग दिया। तब उन चतुर पुरुषों ने आरम्भ में एक निर्विवाद पुरुष - रानी माँ के पति को नरपति बना दिया। नारी सत्ता की समाप्ति वैसी थी जैसे कि स्वर्ग से निष्कासन। चालाकियों , झूठ, दुष्प्रचार साज़िशों का एक दौर शुरू हुआ जो आज भी चल रहा है। नेट पर प्राप्त कुछ तथ्य : “8000 BCE में ही शहद को फरमेंट करा कर मीड मदिरा बना कर पीना शुरू हुआ। बियर और बेरी से बनी मदिरा 6000 BCE से शुरू हुयी।सुमेरियन ने अफीम का इस्तेमाल 5000 BCE से शुरू किया। चीन में 3000 BCE से गांजे का इस्तेमाल शुरू हुआ।” झूठ , चापलूसी और चालाकियों साज़िशों का आरम्भ इन लोगों ने राजा की चापलूसी शुरू की और उसका अहं बढ़ाना शुरू किया। आपसी विवादों में अन्याय शुरू हुआ। राजा के बाद उसके पुत्रों में विवाद शुरू हुआ और फिर लोग अलग अलग होते गए। खानाबदोश...

सभ्यता का सफ़र - 2

मातृ सत्ता मातायें धीरे धीरे मरती गयीं और बच्चे बड़े होते गए लड़कियों ने अपनी माँओं की जगह ली और दुनिया के पहले मानव समाज में matriarchy मैट्री-आर्की स्थापित हुयी और सभ्यता का सफर आरम्भ हुआ। लड़कियों ने अपने को और गुफा को साफ़ रखना और सजाना शुरू किया इसके लिए फूल पत्तियों पंखों का उपयोग किया। लड़कियों ने ही खाने को स्वादिष्ट बनाने और कई दिन तक सुरक्षित रखने के प्रयोग किये। बड़ी बड़ी ठहनियों को ला कर लड़कियों ने गुफ़ा की सफाई शुरू की फूल पत्तियों से सजाना शुरू किया। नाम रखना लड़कियों ने शुरू किया होगा - आग , जल , आकाश , धरती , पेड़ , घास , अलग अलग पशु पक्षी , सूर्य , चन्द्रमा , तारे , बादल , वर्षा। समय के साथ सुबह , दिन , रात , बदलते मौसम और फिर महीने और वर्ष का अंदाजा। हम जो विभिन्न आवाज़ें निकालते हैं उनको मिला कर एक शब्द बनाते हैं - हर शब्द का एक या अधिक मतलब होता है और इन शब्दों को मिला कर हम एक पूरी बात कहते हैं। मैंने जो समझा है उसके हिसाब से सबसे आगे होंठों से निकलने वाली आवाज़ें प , म और ब की हैं - बायें तरफ से प दाहिने तरफ से ब और बीच से म। इन्हीं आवाज़ों से माँ बाप को हम पुकारते हैं। उ...

सभ्यता का सफ़र- 1

धरती पर मानव प्रजाति होमो सेपियन्स का जन्म लगभग 3 लाख वर्ष पूर्व हुआ था। हम से पूर्व धरती पर हम से मिलती जुलती अन्य प्रजातियां जिन्हे होमिनिड कहा जाता है लाखों वर्षों से मौजूद थीं। मानव प्रजाति के इतिहास के दो भाग हैं - एक 3 लाख वर्ष से ले कर पिछले 15 से 20 हज़ार वर्ष तक और दूसरा भाग है पिछले 15 से 20 हज़ार वर्ष से आज तक। अपने उदभव के आरंभिक तीन लाख वर्षों में होमो सेपियन्स में विकास बहुत धीरे धीरे हुआ लेकिन पिछले 15 - 20 हज़ार वर्षों के इतिहास में होमो सेपियन्स बहुत तेज़ी से सभ्य होते गए और यह सभ्यता और प्रगति तेज़ से तेज़ होती गयी और आज आधुनिक युग में हम पहुँच गए। होमो सेपियन्स की आरम्भ की पीढ़ियों को हम होमो सेपियन्स प्री सेपियन्स कह सकते हैं और पिछले 20 हज़ार वर्षों से चल रही पीढ़ियों को होमो सेपियन्स सेपियन्स कह सकते हैं अर्थात प्रजाति तो एक है किन्तु अवस्थाएं दो हैं। मान लीजिये 3 लाख वर्ष पूर्व विकसित मानव प्रजाति को सीधे खड़े हो कर चलना आ गया , हाथों का इस्तेमाल कुशलतापूर्वक करना आ गया डंडी से फल तोड़ना आ गया आग का इस्तेमाल आ गया मछली पकड़ना आ गया पत्थर से औज़ार बनाना आ गया और आपस में इश...