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सभ्यता का सफ़र - 3

इसी बीच कुछ नशीले पदार्थों की और कुछ मनोरंजन की भी खोज हो गयी तो पुरुषों की एक आबादी काम नहीं करना चाहती थी और चालाक साज़िशी थी - लगभग 5 प्रतिशत - आज भी यही स्थिति है। इन लोगों ने धीरे धीरे नारी सत्ता के विरुद्ध दुष्प्रचार शुरू किया। एक दिन उस समय की रानी मां और उसकी सहेलियों ने स्वयं सत्ता को त्याग दिया। तब उन चतुर पुरुषों ने आरम्भ में एक निर्विवाद पुरुष - रानी माँ के पति को नरपति बना दिया। नारी सत्ता की समाप्ति वैसी थी जैसे कि स्वर्ग से निष्कासन। चालाकियों , झूठ, दुष्प्रचार साज़िशों का एक दौर शुरू हुआ जो आज भी चल रहा है। नेट पर प्राप्त कुछ तथ्य : “8000 BCE में ही शहद को फरमेंट करा कर मीड मदिरा बना कर पीना शुरू हुआ। बियर और बेरी से बनी मदिरा 6000 BCE से शुरू हुयी।सुमेरियन ने अफीम का इस्तेमाल 5000 BCE से शुरू किया। चीन में 3000 BCE से गांजे का इस्तेमाल शुरू हुआ।” झूठ , चापलूसी और चालाकियों साज़िशों का आरम्भ इन लोगों ने राजा की चापलूसी शुरू की और उसका अहं बढ़ाना शुरू किया। आपसी विवादों में अन्याय शुरू हुआ। राजा के बाद उसके पुत्रों में विवाद शुरू हुआ और फिर लोग अलग अलग होते गए। खानाबदोशी का दौर शुरू हुआ। एक क़बीले ने मौक़ा मिलने पर किसी दूसरे क़बीले के लोगों को पकड़ कर दास बना लिया और उनसे बोझा ढोने और ऐसे काम कराये जिसे आम तौर पर लोग नापसंद करते हैं। हवस और दुश्मनी की हवा चल चुकी थी क़त्ल और बलात्कार , चोरी और अवैध यौन और नशाखोरी घटित होने लगे। अधिकाँश क़बीले नदियों के किनारे बसते गए इस तरह गाँव बने और खेती पशु पालन आरम्भ हुए। जिनको नदी नहीं मिली उन्होंने जगह जगह कुंऐ खोदे और कुँआ बन जाने पर वहीँ बस गए। पितृ सत्ता के बाद प्रथम मानव समाज में बिखराव पैदा हुआ - कुछ क़बीले जंगल में ही रह गए और शिकार इनका मुख्य धंधा बना रहा , कुछ खाना बदोश की स्टेज पर ठहर गए और टेंट लगा कर रहने लगे और पशुपालन इनका मुख्य धंधा बना रहा। आम लोग जो चालाक न थे वे सभ्यता के विकास में लगे रहे। बड़ी आबादी जगह जगह गाँव बना कर रहने लगी और खेती आरम्भ की , पशु पालन और मछली का शिकार भी अतिरिक्त धंधा रहा। कुछ लोग भाषा और लिपि का विकास करने में लगे रहे कुछ लोग कहानी क़िस्से कहने लगे कुछ कविता नाटक और नृत्य में आगे बढ़े कुछ चित्रकारी करने लगे कुछ दर्शन धर्म अध्यात्म में आगे बढ़े। कुछ लोगों ने मिटटी से आकृतियां बनायीं मूर्तियां बनायीं खिलौने बनाये सील बनायीं। कुछ लोगों ने पत्थरों और चट्टानों को काट कर आकृतियां मूर्तियां बनायीं। कुछ लोगों ने गुफा की दीवारों पर चित्रकारी की। कुछ लोगों ने चट्टानों गुफा की दीवारों पर लिखा। कुछ लोगों ने पेड़ों की छालों पर और मिटटी से बनायी तख्तियों पर लिखा। कुछ लोगों ने नदियों तालाबों समुन्द्र में तैरने और गोता लगाने में महारत हासिल की और वहाँ से उपयोगी चीज़ें प्राप्त की। कुछ ने पेड़ों पर चढ़ने चट्टानों पहाड़ों पर चढ़ने में महारत हासिल की। कुछ ने मकान सड़क पुल बनाने में महारत हासिल की। कुछ लोगों ने लकड़ी के सामान बनाने में महारत हासिल की। कुछ ने सूत कातने कपड़ा बनाने में महारत हासिल की। कुछ ने ऊन बनाने बुनने कालीन बनाने में महारत हासिल की। कुछ ने रंगाई में महारत हासिल की। लकड़ी से दरवाज़े छत दीवारें सीढ़ियां बनायी गयीं कुछ ने अनाज पीसने में महारत हासिल की तेल निकालने में महारत हासिल की। बैल आदि की ताक़त का इस्तेमाल किया। पानी की ताक़त का इस्तेमाल किया। वायु की ताक़त का इस्तेमाल किया। नेट पर प्राप्त कुछ तथ्य: “खेती पशुपालन के प्रमाण लगभग 9500 BCE से मिलते हैं। 7000 BCE से गाँव बसने और खेती के प्रमाण टिगरिस फुरात नदियों के क्षेत्र सीरिया लेबनॉन इस्राएल और जॉर्डन में मिलते हैं। बाजरा और गैंहू उगाये और भेड़ों बकरियों को पाला बाद में गाय बैल और सूअर पाले जौ और चावल की खेती हुआंग ही घाटी नदी चीन और साउथ ईस्ट एशिया में 3500 BCE से मिले हैं मक्का corn सेम beans लौकी squash की पैदावार मेक्सिको और सेंट्रल अमेरिका में 6500 BCE से मिलती है लेकिन वहाँ गाँव 2000 BCE से बसने के प्रमाण हैं।” गाँव में बसने के बाद उद्योग धंधों का विकास हुआ - पहिय्ये की खोज हो गयी थी , मिटटी सान कर गूंध कर पॉटरी बनने लगी थी , मूर्तियां खिलौने बनने लगे थे लकड़ी से पहिया , फर्नीचर हल बनने लगे - पशुओं द्वारा खेत जोतना, बोझा उठवाना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना शुरू हुआ। गाड़ी का निर्माण हुआ जिसमें पहिये होते थे और मनुष्य और सामान ले जाय जा सकता था। मिटटी और छप्पर से झोपड़ियां बनने लगीं। पत्थर का भी इस्तेमाल शुरू हुआ। पत्थर काट काट कर लाये जाने लगे जिनसे मंदिर और महल बनने लगे। नाई का पेशा भी शुरू हुआ। मोची का पेशा भी शुरू हुआ। भेड़ के बालों से ऊन बनना शुरू हुआ कपास से सूत बना और कपड़ा बनना शुरू हुआ। क़साई का पेशा भी शुरू हुआ। चर्बी से मोमबत्ती बनी। जाल बना और मछलियां भारी संख्या में आने लगीं। तेल पेरना शुरू हुआ। पत्थर की चक्की से गैंहू पीसना शुरू हुआ। हर गाँव में कुछ लोगों ने और उनके पूरे परिवार ने किसी विशेष कार्य में दक्षता प्राप्त कर ली और बाक़ी लोग ज़रूरत पड़ने पर उनसे वे चीज़ लेने आने लगे और अदला बदली पर चीज़ें लेने लगे और जब कई गाँव के ऊपर राज्य स्थापित हुए और राजा ने कांस्य युग से मुद्रा का चलन शुरू किया तो मुद्रा से लेन देन शुरू हुयी। कांस्य युग 3300 BCE से आरम्भ हुआ। कुछ लोग पत्थर और लकड़ी से हथियार औज़ार बनाने लगे - कुल्हाड़ी , कुदाल , धनुष बाण आदि। कुछ लोग जानवर की खाल साफ़ करके सुखा कर के ड्रेस और जूते बनाने लगे। कुछ लोग मिटटी की तख्तियां बनाने लगे और कुछ लोग इन पर लिखने और चित्रकारी करने में दक्ष हो गए। कुछ मिटटी से ही खिलौने मूर्तियां बनाने लगे। कुछ हू बहू शक्ल बनाने लगे। कुछ मिटटी के बर्तन बनाने लगे। कुछ लोग जंगल से शहद मोम लाते थे कुछ तेल रंग इत्र निकालते थे। कुछ साफ़ मिटटी लाते थे जो हाथ मुंह धोने नहाने में इस्तेमाल होती थी। कुछ रस्सी बुनने लगे। कुछ मुर्गियां बत्तख पालते थे उनके अंडे बच्चे बेचते थे। कुछ कुत्ते बिल्ली बंदर पालते थे कुछ तोते कबूतर पकड़ कर लाते थे। कुछ बकरी भेड़ गाय भैंस पालते थे उनका दूध बेचते थे और कुछ मांस बेचते थे। कुछ लकड़ी का बेलन पटरा बनाते थे। कुछ बड़े कारीगर थे जो लकड़ी के पहिये और गाड़ी बनाते थे। कुछ दरवाज़ा खिड़किया मेज़ कुर्सी बनाते थे। कुछ मकान बनाने में दक्ष होते गए। कुछ दवाएं विष खोजने बनाने में दक्ष हो गए। कुछ नशे का कारोबार करने लगे। पितृ सत्ता में ही जुआ शराब और वेश्यावृत्ति का आरम्भ हो गया। राज्य स्थापित होने के बाद चौकीदार पुलिस की नियुक्ति होने लगी। दण्ड का विधान भी बना और कारागार भी बने और मृत्यु दण्ड भी दिए जाने लगे - चोरी के आरोप में भी मृत्यु दण्ड दिए जाने लगे। लोग झूठे भी फंसाए जाने लगे। सभी कारोबार एक गाँव में नहीं होते थे बल्कि अलग अलग गाँव में होते थे और लोग कुछ लेना हो तो जिस गाँव में होता था उस गाँव में जाते थे। और बेचने वाले अपना सामान ले कर गाँव गाँव जाने लगे। फिर किसी उपयुक्त स्थान पर सप्ताह में विशिष्ट दिनों में मण्डी बाज़ार लगने लगे और बेचने खरीदने वाले वहां जाने लगे। धोखा धड़ी जेब काटना शुरू हुआ। चोरी डकैती शुरू हुयी। नक़ली मुद्रा भी बनने लगी। राजाओं ने उपयुक्त जगह पर नगर बसाये - सड़क पुल सराय बाजार मंदिर स्कूल चिकित्सालय सब एक जगह हो गए। जुआ खाना शराब खाना वेश्यालय भी एक तरफ हो गए। यातायात की व्यवस्था हुयी भोजन पान तम्बाकू की दुकाने लगीं। हर तरह का सामान बिकना खरीदना शुरू हुआ। पुरुष सत्ता या पितृ सत्ता स्थापित हो जाने के बाद चालाकी, चापलूसी और निर्दयता का वह दौर आरम्भ हुआ जो आज तक चल रहा है। चाहे जंगल के क़बीले हों या खाना बदोश या गाँव में बसे लोग हर जगह कुछ लोग जिन्हें काम नहीं करना था पर लाभ पूरा लेना था और दूसरों पर रौब भी गाँठना था मुखिया के निकट हो गए और उसके द्वारा अपने मन की करवाने लगे। राजा बनवाने के बाद इनकी शक्ति और बढ़ गयी इस तरह मानव समाज में दो वर्ग - ख़ास और जन बँट गए। इन लोगों ने पहले तो राजा और उसके परिवार को और लोगों से श्रेष्ठ बताया और राजा के बाद उसी का बड़ा पुत्र राजा बनेगा यह परंपरा स्थापित की। राजा के लिए एक से अधिक पत्नियों और दासियों की व्यवस्था लागू की। बाद में राजा का उत्तराधिकारी कौन बनेगा यह भी उनके हाथ में हो गया - राजा अनेकों बार उनके ही हाथ की कठपुतली बन कर रह गया। लेकिन इस ख़ास वर्ग में ऐसे भी लोग थे जिन्होंने चालाकी के बजाए सर्व हित के प्रयास किये। टेक्नोलॉजी में बड़ी बड़ी खोजें इन्होने ही की , कला संगीत भाषा और साहित्य का विकास इन्होने ही किया। धर्म अध्यात्म में उत्थान इन्होने ही किया। इतिहासकार भी इन्हीं में से बने। काम शास्त्र भी इन्होने लिखा और अर्थशास्त्र भी इन्होने लिखा। ज्योतिष विद्या और भविष्य बताना इन्होने शुरू किया। कुछ लोगों की ज़रुरत भी थी और कुछ इनकी महत्वाकांक्षा भी थी कि धर्म के नाम पर मंदिर बनाये और अपने शिष्यों को गाँव गाँव भेजा जो लोगों को तीर्थ और दान के लिए प्रेरित करें। शिष्यों के द्वारा गाँव गाँव जा कर बच्चों का नामकरण और दूसरे संस्कार शुरू किये गए । व्यापारी और उद्योगपति इनमें से ही बने। किसान और कारीगर वास्तव में जो मूल उत्पादक थे उनका स्तर गिर गया और वे समय के साथ व्यापारी वर्ग के दास और सेवक बन गए। कुछ पेशे तो काफी लम्बे समय तक स्वतंत्र रहे जैसे कि नाऊ नाऊन मोची और धोबी दूध क़साई दर्ज़ी आदि जिनका सीधा संपर्क आम परिवारों ख़ास परिवारों राज महल और मंदिर तक सीधे रहा। चिकित्सक और शिक्षक भी अपनी योग्यता व अनुभव के आधार पर आम जन से राज महल तक पहुँचते रहे। लेकिन अन्य उत्पादन समय के साथ व्यापारी के आधीन हो गए और इन्हें करने वाले अपना माल व्यापारी को सस्ते दाम देने पर विवश थे। व्यापारी इस माल को आस पास की बाज़ारों में भेज कर मुनाफा कमाता था और आज की दुनिया में यह व्यापार वैश्विक स्तर तक पहुँच गया है। राजाओं ने लोगों के नहाने के लिए तालाब बनवाये पीने के पानी के लिए कुऍं खुदवाये मार्ग बनवाये मार्ग के दोनों तरफ पेड़ लगवाए यात्रियों के ठहरने के लिए सराय बनवायीं। नदियों पर पुल बनवाये। राजाओं ने उपयुक्त स्थानों पर नगर बसाये जहां बाज़ार होती थीं। मंदिर स्कूल चिकित्सालय आश्रम बनवाये। जो खानाबदोश पहाड़ों पर बसे वे तेज़ सर्दी में नीचे उतर आया करते थे और कुछ महीनों बाद पुन: पहाड़ पर चले जाते थे। वे ख़ानाबदोश जो जंगजू होते थे गाँव या नगर पर हमला कर के लूट मार कर के लौट जाते थे या कभी ख़ुद क़ब्ज़ा कर के वहाँ बस जाते थे और अपनी जीवन शैली बदल देते थे। बसे लोगों से खानाबदोश लोगों का दूसरा रिश्ता व्यापार का था जिसमें वर्ष में एक बार फल ड्राई फ्रूट्स जड़ी बूटियां ऊनी कपड़े बेचने गाँव या नगर जाते थे। कुछ क़बीले चोरी करते थे। कुछ कच्ची शराब ला कर बेचते थे। कुछ औरतें गाँव नगर के बाहर खेमा लगा कर कुछ दिन के लिए टिकती थीं और देह व्यापार करती थीं। कुछ परिवार संगीत नृत्य गायन गाँव गाँव घूम कर करते। कुछ खानाबदोश समय के साथ धातु निष्कासन और उनसे चीज़ें बनाने में माहिर हो गए और इन चीज़ों का व्यापार करने लगे। कुछ अच्छी नस्ल के घोड़ों ऊंटों की ब्रीडिंग करने लगे। गाँव में कृषि मुख्य उत्पादन बन गया जिसके लिए सिंचाई की ज़रुरत थी इसके लिए अनेक विधियां और उपकरण विकसित किये गए जिनको या तो मनुष्य चलाते थे या पशु चलाते थे - पशुओं को गोल चक्कर में घुमाए रखने के लिए उनकी आँखों में पट्टी बाँधी गयीं और गले में घंटियाँ बाँधी गयीं। लेकिन जब राज्य बने और उनके ऊपर साम्राज्य बने तो इनकी आय किसानों से लगान वसूल कर होती थी। राज्य और साम्राज्य व्यापारियों से टैक्स लेते थे लेकिन व्यापारी वर्ग राजा और उसके परिवार और राज्य से जुड़े लोगों से अच्छे सम्बन्ध बना कर उन्हें उपहार और अन्य प्रकार से लाभ पहुंचा कर टैक्स कम से कम रखवाते थे। किसानों से सख्ती से लगान वसूली जाती थी और लगान न दे पाने की स्थिति में उन्हें शारीरिक दंड जेल फसल को नष्ट कर देने उनके जानवर बाँध कर ले जाना यह सब होता था। 12000 वर्ष पुराने कुऍं पाए गए हैं इसका यह मतलब है कि इसके पूर्व लोग नदी तालाब के पास रहते रहे होंगे और जब इन प्राकृतिक स्रोतों से दूर जाना पड़ा तो उन्हें कुऍं खोदने पड़े। हाथों से खोदा गया सबसे गहरा कुआं 1285 फ़ीट का है जो ईस्ट ससेक्स में 1858 में खोदा गया था। मॉडर्न हैंड पम्प 1650 में निर्मित हुए - 4000 वर्ष पूर्व मिस्र के लोग बाल्टी और रस्सी का इस्तेमाल कर के कुऍं से पानी खींचा करते थे। शीशा प्राकृतिक रूप में उपलब्ध था और 2000 BCE में मेसोपोटामिया और मिस्र में शीशे का निर्माण शुरू हो गया था। पहिया का निर्माण 3500 BCE में हुआ। 1200 BCE से लौह युग आरम्भ हुआ। लोग तलवार और भाले ले कर घोड़ों , हाथियों और रथ पर निकल पड़े और मारकाट शुरू की। मिस्र में पेपिरस चौथी शताब्दी ईसा पूर्व ईजाद हुआ कागज़ का निर्माण चीन में पहली शताब्दी पूर्व हुआ था पर लिखने योग्य कागज़ का निर्माण आधुनिक युग की तीसरी शताब्दी में हुआ। 18 वीं शताब्दी से इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग आरम्भ हुआ। प्लास्टिक का निर्माण 19 वीं 20 वीं शताब्दी में हुआ और आज की दुनिया वजूद में आयी।  

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