मनुष्य से मिलते जुलते एप (Ape) होते हैं तो इन्हीं कि कोई प्रजाति मनुष्य से ज़्यादा मिलती जुलती रही होगी जिसे Anthropoid Ape एंथ्रोपोइड एप कह सकते हैं उसी से हज़ारों लाखों वर्षों में विकसित हो कर हम अस्तित्व में आये। मान लीजिये उस प्रजाति को सीधे खड़े हो कर चलना आ गया , हाथों का इस्तेमाल कुशलतापूर्वक करना आ गया डंडी से फल तोड़ना आ गया आग का इस्तेमाल आ गया मछली पकड़ना आ गया पत्थर से औज़ार बनाना आ गया और आपस में इशारे और कुछ आवाज़ निकालना आ गया। मेरी यह कल्पना है कि इस प्रजाति में जेनेटिक सेल्फ एक्सटिंक्शन हुआ और केवल कुछ मादा एंथ्रोपोइड एप के अनोखे बच्चे पैदा हुए जिनके शरीर पर चेहरे पर बाल नहीं थे और दुम नहीं थी - ऐसे सुन्दर बच्चे जिन पर उनकी एप मातायें मुग्ध हो गयीं और उन्हें डर हुआ कहीं उनके नर एप इन बच्चों को मार ना डालें तो इन माताओं ने इन बच्चों को एक गुफा में ले जा कर छुपा दिया। यह मातायें बारी बारी छुप कर अपने अनोखे बच्चों की की देखभाल के लिए गुफा में आती थीं - गुफा के पास पानी का झरना था और फलों के पेड़ थे। आज भी हर माँ को लगता है कि उसका बच्चा सबसे अनोखा है। बच्चों को साफ़ करतीं दूध...