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Showing posts from March, 2022

सभ्यता का सफर - 1

मनुष्य से मिलते जुलते एप (Ape) होते हैं तो इन्हीं कि कोई प्रजाति मनुष्य से ज़्यादा मिलती जुलती रही होगी जिसे Anthropoid Ape एंथ्रोपोइड एप कह सकते हैं उसी से हज़ारों लाखों वर्षों में विकसित हो कर हम अस्तित्व में आये। मान लीजिये उस प्रजाति को सीधे खड़े हो कर चलना आ गया , हाथों का इस्तेमाल कुशलतापूर्वक करना आ गया डंडी से फल तोड़ना आ गया आग का इस्तेमाल आ गया मछली पकड़ना आ गया पत्थर से औज़ार बनाना आ गया और आपस में इशारे और कुछ आवाज़ निकालना आ गया। मेरी यह कल्पना है कि इस प्रजाति में जेनेटिक सेल्फ एक्सटिंक्शन हुआ और केवल कुछ मादा एंथ्रोपोइड एप के अनोखे बच्चे पैदा हुए जिनके शरीर पर चेहरे पर बाल नहीं थे और दुम नहीं थी - ऐसे सुन्दर बच्चे जिन पर उनकी एप मातायें मुग्ध हो गयीं और उन्हें डर हुआ कहीं उनके नर एप इन बच्चों को मार ना डालें तो इन माताओं ने इन बच्चों को एक गुफा में ले जा कर छुपा दिया। यह मातायें बारी बारी छुप कर अपने अनोखे बच्चों की की देखभाल के लिए गुफा में आती थीं - गुफा के पास पानी का झरना था और फलों के पेड़ थे। आज भी हर माँ को लगता है कि उसका बच्चा सबसे अनोखा है। बच्चों को साफ़ करतीं दूध...

आज फिर सुलहे कुल

हमारे देश की दो सामाजिक समस्याएं हैं जिनका हल शिक्षित हिन्दू और मुस्लिम को ढूंढना है - इनका हल किसी राजनैतिक पार्टी द्वारा संभव नहीं है - राजनैतिक पार्टियां तो इन समस्याओं का दुरूपयोग कर के चुनावी लाभ लेती रहेंगी। जब तक यह दोनों समस्याएं सुलझेंगी नहीं तब तक देश की आर्थिक समस्या - बेरोज़गारी और मंहगाई पर नियंत्रण नहीं हो सकेगा। पहली समस्या है जातीयता और दूसरी समस्या है सम्प्रदायिकता। जातीयता का बहुत आसान हल है - हर शिक्षित व्यक्ति जानता है कि हम सब मनुष्य एक प्रजाति के हैं और हमारी उत्पत्ति विकास से हुयी है। जाति और नस्ल प्राचीन राजनीति है और धर्म मध्यकालीन राजनीति हैं जिनका दुरूपयोग कर के एक वर्ग ने दूसरे वर्ग पर हमला किया और ग़ुलाम बनाया। आज हम हर युवक युवती को इस बात की स्वतंत्रता और अधिकार दें कि वे स्वेच्छा से आपस में विवाह कर सकें। हम सब जाति सूचक नाम हटा कर अपना नाम अपनी माता का नाम और अपने पिता के नाम को मिला कर नए ढंग का नाम रखना शुरू कर दें। साम्प्रदायिकता को समाप्त करने के लिए शिक्षित मुसलामानों को मज़हब को नए तरीके से समझना होगा। मज़हब सिर्फ इतना कहता है कि एक फैसले का दिन ...

आधुनिक नैतिकता

हिंदुस्तान के सभी शिक्षित हिन्दू और मुस्लिम को चाहिए कि आधुनिक नैतिकता को अपनायें और धर्म मज़हब को बिलकुल निजी मामला कर दें। हर धर्म/ मज़हब के 4 अंग है 1 पूजा वंदना नमाज़ prayers 2 व्रत रोज़ा fasting 3 दान ज़कात alms 4 तीर्थ हज pilgrimage - जिसकी मर्ज़ी जैसा चाहे करे। व्यक्तिगत , पारिवारिक , सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में हम सब को ज़रुरत है नैतिकता को अपनाने की। सबसे पहली चीज़ है हर स्त्री पुरुष के अधिकार हैं स्वतंत्रता है मर्ज़ी है जिसमें किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स में यह सारे अधिकार स्पष्ट रूप से व्यक्त किये गए हैं। https://www.un.org/en/about-us/universal-declaration-of-human-rights इसके बाद बहुत महत्वपूर्ण है महामारक अस्त्रों के निर्माण का बंद होना और उनका नष्ट किया जाना। प्रदूषण का रोका जाना। अंतर्राष्ट्रीय अपराध - नशीले पदार्थों की तस्करी और व्यापार , ह्यूमन ट्रैफिकिंग , स्त्रियों और बच्चों का यौन शोषण और तस्करी , पोर्नोग्राफी व्यापार। कितने असहाय स्त्रियां और बच्चे अपराध तंत्र में क़ैद हैं दासता का जीवन जी रहे हैं। कितने लोग दासता ...

बायो वेपन Bio -weapon ख़ास एक क़ौम के खिलाफ

आज की दुनिया के यथार्थ से आंखें बंद कर के जीना भी क्या जीना ? अमेरिका रूस चीन जैसे देशों में लगातार महा मारक अस्त्रों और जासूसी के सॉफ्ट वेयर विकसित किये जा रहे हैं। नुक्लेअर अस्त्रों से जीवन और बिल्डिंग सड़क पुल सभी नष्ट होते हैं नेपाम बम में ऊष्मा से जीवन नष्ट होता है पर बिल्डिंग सड़क पुल बच जाते हैं। केमिकल अस्त्र से जीवन नष्ट होता है और इसका प्रभाव लम्बे समय तक रहता है फसल होगी नहीं या विष का प्रभाव रहेगा। ज़रुरत ऐसे अस्त्र की भी है जो सिर्फ दुश्मन की क़ौम पर असर करे। Terminator फिल्म में एक रोबोट का निर्माण किया गया था एक विशेष व्यक्ति महिला को नष्ट करने के लिए। Face Recognition Technology परफेक्ट हो चुकी है चीन उइगर लोगों को बंद किये हुए है और उनके लिए भाग निकलना इसीलिए असंभव हो चुका है। रेटिना का स्कैन हर व्यक्ति का अलग होता है और UID के डाटाबेस में हरेक का रेटिना का स्कैन मौजूद है। वैसे तो हम सब में कोई जेनेटिक अंतर नहीं है लेकिन डीएनए के लम्बे हिस्सों में जो बेस सीक्वेंस होते हैं जो हो सकता है अलग अलग क़ौमों की निशानदेही कर सकें और फिर ऐसे वायरस विकसित किये जा सकें जो उस...

मुसलमान आधुनिक सभ्यता के शत्रु के रूप में ?

आधुनिक सभ्यता मुसलामानों की ही देन है जिसे यूरोप ने उनसे लेकर विकसित किया - आज भी अधिकाँश तारों के नाम अरबी भाषा में हैं और अलजब्रा भी अरब की देन है। यह सत्य है कि मुसलमान पिछड़ गए - उनके ख़लीफ़ाओं और मौलवियों ने उन्हें पिछड़ा बना दिया और जब प्रिंटिंग प्रेस का यूरोप ने निर्माण किया तो ओटोमन मुस्लिम साम्राज्य के मुफ़्ती ने इसके खिलाफ फतवा दे दिया। मुफ़्ती जीतते गए साहिबे अक़्ल मुसलमान हारते गए - दाढ़ी बढ़ा कर अपनी औरतों को परदे में रख कर मस्जिद में पांच वक़्त नमाज़ पढ़ना बस यही मुसलमान की ज़िन्दगी बन गया और सत्ता उनके ख़लीफ़ा , बादशाह या मिलिट्री तानाशाह के हाथ जिनका काम ज़ुल्म और अय्याशी। यहां तक भी दुनिया को क्या सरोकार ! 9/11 2000 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला कर के दुनिया भर का कमज़ोर से कमज़ोर मुसलमान आधुनिक सभ्यता के खतरनाक दुश्मन के रूप में हो गया। मुसलामानों का भी जिहाद से प्रेम उभर आया। सऊदी अरब में बादशाह की मर्ज़ी रज़ामंदी से अमेरिकी फौजी अड्डा बना - शाही हटाते प्रजातंत्र क़ायम करते या अमेरिकी फ़ौज से वहीँ ज़मीन पर लड़ते जिस तरह क्यूबा विएतनाम जैसे देश लड़े थे। पर बेगुनाहों को मार कर जिहाद ...

मुसलामानों के खिलाफ इतनी नफरत क्यों ? शिक्षित मुसलामानों को सोचने समझने की ज़रुरत

सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं अमेरिका यूरोप चीन बर्मा श्री लंका और लगभग सभी देशों में जहां मुसलमान अल्प संख्यक हैं नफरत और हिंसा का शिकार हो रहे हैं जिसका आरम्भ लगभग 9 / 11 के बाद शुरू हुआ है। अभी इसी होली में अमरोहा में 1 . 3 0 बजे जुमअ की नमाज़ के वक़्त बाहर हिन्दू भीड़ ने ज़ोर शोर से डी जे बजाना शुरू किया , मुसलमान मस्जिद से बाहर आये तकरार हुई और मारपीट हुयी। शासन इनके विरुद्ध प्रशासन पुलिस इनके विरुद्ध न्यायपालिका इनसे बदज़न मीडिया इनका दुश्मन पर इन सब से बेपरवाह इससे बेपरवाह पुलिस इन्हे ही फंसाये गई जेल जाएंगे ज़मानत के लिए दौड़ेंगे कारोबार ठप्प होगा बीवी बच्चे परेशान होंगे मुक़द्दमा चलेगा।यहाँ लखनऊ में मुसलामानों ने जुमे की नमाज़ का वक़्त होली वालों के लिए आगे बढ़ा कर रखा तो हिन्दुओं ने कहा हम होली 12 के पहले ही ख़त्म कर देंगे - यह है असली हिन्दुस्तान। मुसलमान अब वह सबक़ भूल गए हैं - सऊदी पैसे से कट्टर हो गए हैं मस्जिदों में इतनी मस्जिदों में तेज़ आवाज़ से 5 वक़्त अज़ान दी जाती है पड़ोसियों का ख़याल किये बिना मुझे शर्म आती है अफ़सोस होता है। मुसलमान को अपना नमाज़ रोज़ा ईद बक़रीद मुहर्रम सब अपने गाँव ...

आस्था और धर्म के परे

अनेक लोगों के लिए भावनात्मक रूप से यह संभावना असहनीय है कि इस जगत से परे या मृत्यु के बाद कोई अस्तित्व नहीं है इसीलिए हमें धर्म और आस्था की ज़रुरत है लेकिन आस्था के नाम पर लोगों को कितना धोखा दिया गया है और धर्म के नाम पर कितनी हिंसा हुयी है और कितनी नफरत अब भी फैलाई जा रही है इसको भी समझने की ज़रुरत है। दुनिया में जन्मे किसी व्यक्ति को हम भगवान् कहें या ईश्वर का अवतार कहें या ईश्वर का बेटा कहें या ईश्वर का पैग़ंबर कहें ठीक है पर इसको दूसरों पर थोपना गलत है यह सब हमारा निजी मामला है और हरेक का निजी मामला है अब अगर हमारे धर्म के मानने वाले लोगों ने लोगों पर ज़ुल्म किये या लोगों को गुलाम बनाया या ऊंच नीच बनायी तो यह सब मानवता के विरुद्ध अपराध है हमें ऐसे भूत और ऐसे वर्त्तमान से अपने को स्वतंत्र कर के अपने को मुक्त करने की ज़रुरत है वास्तव में यही मोक्ष है। जातिगत ऊंच नीच से अपने को अलग करना बहुत आसान है : लोग जातिवादी नाम हटा दें बस अपना नाम माता का नाम और पिता का नाम जोड़ कर पूरा ट्रिप्लेट नाम रखना शुरू कर दें। एक वयस्क लड़का और लड़की अपनी पसंद से विवाह करना चाहें तो उन्हें करने दें। सत्य को...

शिक्षित हिंदुस्तान

हम हिंदुस्तान के शिक्षित युवा युवतियों को अब अपने विचार अपनी भावनायें खुल कर सामने रखने की ज़रूरत है। धर्म ग्रंथों में चाहे जो लिखा हो हम उस सत्य और उस नैतिकता को मानेंगे जो आधुनिक युग की देन हैं जो वर्षों की सूझ बूझ का नतीजा हैं। हम सारे इंसान एक मानव प्रजाति हैं जो विकास के बाद पूरी दुनिया में फैलीं और पिछले कुछ दशकों में हमारी आँखों के सामने या हमारे माता पिता के जीवन काल में आश्चर्यजनक चीज़ें खोजीं और विकसित की। धरती पर रह कर हमको लगता है कि आसमान एक छत है और ज़मीन फर्श है और सूरज चाँद और पूरा आकाश घूम रहा है। विज्ञानं ने यह सत्य उजागर किया कि पृथ्वी सौर मण्डल का एक ग्रह मात्र है और अनेक ग्रह मार्स , जुपिटर सैटर्न इससे भी बड़े है लेकिन जीवन सिर्फ पृथ्वी पर है। सूर्य हमारी गैलेक्सी के करोड़ों तारों में मात्र एक मध्यम दर्जे का तारा है और इस सृष्टि या कॉसमॉस में trillions खरबों गैलेक्सीज हैं। इस विशाल कॉसमॉस में हम 100 वर्ष से कम के व्यक्तिगत जीवन काल में अलग अलग पहचान बना कर दूसरों का दमन शोषण खून खराबा करते रहे हैं और हम नस्ल जाति धर्म में बंट गए हैं और नतीजे में दुनिया नफरत का श...

मुसलामानों का रवैय्या कितना गैर इस्लामी और कितना आत्मघाती

हिजाब बैन पर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम लड़कियां हिजाब पहने सड़क पर आ गयीं और अल्लाहु अकबर के नारे लगाए और जाने कोई साहब कैसे पूरे कर्णाटक के अमीरे शरीयत बन गए उन्होंने आज पूरे कर्णाटक बंद का आह्वान किया है। बस एक कमी है कोई साहब पूरे हिंदुस्तान के मुसलामानों के खलीफा बन कर अमीरे मुस्लिमाने हिन्द बन कर भारत बंद का भी आह्वान कर दें। इस्लामी मुल्क में जहां हाथ बाँध कर नमाज़ पढ़ी जाती है कोई हाथ खोल कर नमाज़ नहीं पढ़ सकता और कोई औरत बिना महरम रिश्तेदार के घर के बाहर निकल नहीं सकती जहां कितनी मस्जिदें और मुक़द्दस मक़ामात ढह दिए गए और जहां बोलने लिखने की आज़ादी नहीं है वहाँ ज़रा सी बात पर सर काट दिया जाता है कोई चूं नहीं कर सकता और यहाँ अगर प्रजातंत्र न होता तानाशाही होती तब भी न आप सड़क पर आते अल्लाहु अकबर के नारे लगाते और न कर्णाटक बंद का आह्वान करते। आप को क्या इसका इंतज़ार है कि तानाशाही मिलिट्री शासन हो जाए या हिन्दू राष्ट्र बन जाए या जर्मनी की तरह 20 - 25 लाख बेगुनाह लोग मार डाले जायें ? आपके गलत रवैय्ये से हकीकत में देश उसी रास्ते पर पहुँच गया है - कहने को प्रजातंत्र है निष्पक्ष न...

उग्र भीड़ की मानसिकता समझिये और उसके पीछे की राजनीति समझिए

आप ने अपने घर में एक बगीचा लगा रखा है जिसमें फूल पौधे लगा रखे हैं या आप तरकारी पैदा करा रहे हैं , आप के अमरुद या आम के पेड़ पर फल आये हुए हैं आपकी छत पर एंटीना लगा है और गमले सजा रखे हैं - एक दिन बंदरों की फ़ौज आएगी और सब तहस नहस कर देगी - कुछ फल खा ले ज़्यादा काट काट कर फैक देंगे। उनको ज़रुरत नहीं है भूखे नहीं हैं उन्हें आप से शिकायत है - आप विकास में बढ़ गए हैं और वे पीछे रह गए।बस यही मानसिकता है शिक्षा सभ्यता और संस्कृति में पिछड़ गए लोगों की। अब कोई संगठन उन्हें कोई आइडियोलॉजी पढ़ा कर ब्रेन वाश करा कर विकसित सभ्य शिक्षित लोगों पर हमले करवा सकता है लूटमार विनाश और बलात्कार।इसी अशिक्षित असभ्य झुण्ड को मार्क्सवाद पढ़ाया जा सकता है या कट्टर वहाबी बना कर शियों पर हमले कराये जा सकते हैं जो पाकिस्तान में जमात करा रही है या हिंदुस्तान में संघ अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले करवा रहा है। लेकिन इनके पालने वालों को यह भी खतरा रहता है कि कहीं यह मानव बम उन्हीं पर न पलट पड़ें - इसीलिए मार्क्सिस्ट बुद्धिजीवियों को बहुत बड़ा खतरा समझा जाता है उन्हें जेल में सड़ाया जाता है या राजनैतिक हत्या कराई जाती है। सीध...

कांग्रेस और सेक्युलरिज़्म

बात शिक्षा और संस्कृति की है हमारे समाजिक जीवन की है - शिक्षित सम्पन्न हिन्दू और मुस्लिम परिवारों की एक मिली जुली संस्कृति थी - धर्म अलग था और खान पान भी अलग था पर धीरे धीरे जैसे किसी ने कहा है दूरियां घटती गयीं फ़ासले बढ़ते गए। शिक्षित हिन्दू और शिक्षित मुस्लिम दोनों सेक्युलर थे और कांग्रेस को वोट देते थे फिर धीरे धीरे जातिवादी राजनीति शुरू हुयी इनके नेताओं का अंदाज़ और बातचीत संस्कृति और सभ्यता के विरुद्ध होने लगी - लालू प्रसाद यादव और मायावती की कार्यशैली को जिन्होंने क़रीब से देखा है वे जानते हैं और मुसलामानों में भी ऐसे बेढब लोग - आज़म खान और ओवैसी बंधु हैं। जो हमारी तहज़ीब है क्या उसमें उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों से ऐसे बात की जाती है जैसी मायावती और आज़म खान करते थे ? उधर सऊदी प्रभाव और पैसे से मुसलामानों में कट्टरवाद बढ़ा जिसका नमूना शाह बानो केस में देखने में आया - एक वकील ने वर्षों की जीवन संगनी को तलाक़ दिया वह सुप्रीम कोर्ट गयी वहाँ मेंटेनेंस का आदेश हुआ जिसके विरुद्ध आम मुसलामानों को सड़क पर उतार दिया। राजीव गाँधी झुक गए। इससे शिक्षित हिन्दू बहुत निराश हुआ। मुसलामानों म...