सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं अमेरिका यूरोप चीन बर्मा श्री लंका और लगभग सभी देशों में जहां मुसलमान अल्प संख्यक हैं नफरत और हिंसा का शिकार हो रहे हैं जिसका आरम्भ लगभग 9 / 11 के बाद शुरू हुआ है।
अभी इसी होली में अमरोहा में 1 . 3 0 बजे जुमअ की नमाज़ के वक़्त बाहर हिन्दू भीड़ ने ज़ोर शोर से डी जे बजाना शुरू किया , मुसलमान मस्जिद से बाहर आये तकरार हुई और मारपीट हुयी। शासन इनके विरुद्ध प्रशासन पुलिस इनके विरुद्ध न्यायपालिका इनसे बदज़न मीडिया इनका दुश्मन पर इन सब से बेपरवाह इससे बेपरवाह पुलिस इन्हे ही फंसाये गई जेल जाएंगे ज़मानत के लिए दौड़ेंगे कारोबार ठप्प होगा बीवी बच्चे परेशान होंगे मुक़द्दमा चलेगा।यहाँ लखनऊ में मुसलामानों ने जुमे की नमाज़ का वक़्त होली वालों के लिए आगे बढ़ा कर रखा तो हिन्दुओं ने कहा हम होली 12 के पहले ही ख़त्म कर देंगे - यह है असली हिन्दुस्तान। मुसलमान अब वह सबक़ भूल गए हैं - सऊदी पैसे से कट्टर हो गए हैं मस्जिदों में इतनी मस्जिदों में तेज़ आवाज़ से 5 वक़्त अज़ान दी जाती है पड़ोसियों का ख़याल किये बिना मुझे शर्म आती है अफ़सोस होता है। मुसलमान को अपना नमाज़ रोज़ा ईद बक़रीद मुहर्रम सब अपने गाँव मोहल्ले शहर के पड़ोसियों की रज़ामंदी से करने की ज़रूरत है।
इस्लाम में बल और हिंसा का प्रयोग शुरू से ही हो गया था - यहूदी ईसाई जिनके पास आसमानी किताब है वे ज़िम्मी के दर्जे पर रहेंगे और जज़िया देंगे - उनसे लड़ो जब तक राज़ी न हो जायें। जिनके पास आसमानी किताब नहीं है उनसे लड़ो क़त्ल करो या वे ईमान ले आयें। फिर जो क़बीले मुसलमान हो गए उन्हें ज़कात देना होता था उसे रोकने पर उन पर लश्कर भेजा जाता था।
आज यह हालत है कि किसी भी इस्लामी देश में इस्लाम के दूसरे फ़िरक़े के लोगों को अपना मज़हब छुपा कर रखना पड़ता है किसी भी तरह की आज़ादी किसी को नहीं है लेकिन वही मुसलमान दूसरे धर्म निरपेक्ष प्रजातांत्रिक देशों में अपनी पहचान अपने हक़ के लिए लड़ते रहते हैं। पूरी दुनिया में सिर्फ हमारे फ़िरक़े का इस्लाम जो हक़ है वही रहे यह हर मुसलमान चाहता है।
यही मन: स्थिति सिर्फ मुसलमान की ही नहीं यहूदियों ईसाईयों और हिन्दुओं की भी है सभी अपने मज़हब को हक़ समझ कर पूरी मानवजाति पर थोपना चाहते हैं।
पर हक़ क्या है ?
हर धर्म के 4 अंग है 1 पूजा वंदना नमाज़ prayers 2 व्रत रोज़ा fasting 3 दान ज़कात alms 4 तीर्थ हज pilgrimage
यह हरेक की अपनी मर्ज़ी और पसंद का मामला है।
हम अपने गाँव मोहल्ले में अमन से रहें आपसी प्रेम सौहार्द्र मिलना जुलना रहे एक दूसरे की मदद करें और दुनिया भर में शान्ति और अमन और इन्साफ के लिए खड़े रहें और कोशिश करते रहें शिक्षा विज्ञान और टेक्नोलॉजी में हम सब आगे बढ़ें।
Viewing things either as male or as female has distorted our perceptions. Only some living things are male and female and even such things require gender free word most of the times. For example a human being needs to be addressed by some common word but the common word ‘man’ has been taken by male of the species. The male has penis and female has womb- so woman is correct word for female of human species and accordingly male of human species must be called ‘peman’ while man should be used where there is no need to express gender. At microscopic level, the female gamete remains at one place and male gamete reaches it and gets attached. 1. Most harm has caused to our thinking and feelings by understanding God in male image. 2. Many things having nothing to do with sex dichotomy are understood as male or female- for example in Hindi palang is masculine while kursi and mez are feminine. 3. Even our emotions are treated as masculine or feminine for example pyaar is masculine and muhabbat ...
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