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Showing posts from May, 2022

परलोक की बात छोड़िये , इस लोक का सत्य तो यह है !

हर देश में धर्म , नस्ल , जाति , भाषा आदि के आधार पर एक से अधिक समुदाय रहते हैं जो समुदाय बहुसंख्यक होता है वही अपने को धरती पुत्र कहता है जबकि सत्य यह है कोई भी कहीं भी हमेशा से नहीं रह रहा है। इसी बहुसंख्यक समुदाय के अंदर एक अत्यंत अल्प संख्यक गुट होता है उन परिवारों का जो आपस में जन्म और रिश्ते से जुड़े रहते हैं और जिन्होंने कालांतर में उस देश की सत्ता और संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर लिया होता है। यही परिवार और इनसे जुड़े लोगों को देश की हर व्यवस्था हर विभाग - शिक्षा , व्यवसाय , राजकीय सेवा , बैंकिंग , मीडिया , पुलिस , इंटेलिजेन्स , न्याय पालिका सेना हर जगह वर्जस्व प्राप्त हो जाता है। अपना वर्जस्व बनाये रखने के लिए और इनके अपने समुदाय के लोग अपना हक़ न मांगें उन्हें अपने आधीन बनाये रखने के लिए दूसरे किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और इस कमज़ोर वर्ग को हिंसा का शिकार बनाते हैं - हिटलर ने यहूदियों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को शिकार बनाया ताकि आम जर्मन नागरिक बेरोज़गारी और मंहगाई के खिलाफ एक जुट न हो जाए। पाकिस्तान में शियों को शिकार बनाया जा रहा है भारत में मुसलामानों को शिकार बना...

जन दिवस - दुनिया भर में एक दिन !

सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं। इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है ! इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है। दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है कहीं कोई तानाशाह कहीं कोई कम्युनिस्ट कहीं कोई मुल्ला - आज की दुनिया ऐसे नहीं छोड़ी जा सकती - कोई किसी का आंतरिक मामला नहीं है - हर जगह प्रजातंत्र होना चाहिए और हर जगह चुनाव सिस्टम और प्रोसेस पर पूरी दुनिया की नज़र होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक जुट होने की ज़रूरत है। वर्ष में एक दिन जन दिवस क...

किसी भी संगठित धर्म को न मानिये

न किसी थोपी गयी आस्था के भंवर में डूबिये न किसी के द्वारा गढ़े गए धर्म के जंजाल में फंसिए। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को देखिये और आज के म्यांमार और श्री लंका के बौद्धों को देखिये। कोई धर्म 5000 वर्ष पहले आया था कोई 2000 वर्ष पूर्व और कोई 1400 वर्ष पूर्व - समय के साथ शब्दों के अर्थ ही बदल जाते हैं - धार्मिक शिक्षाओं को आज की परिस्थितियों में ढालने की ज़रूरत है न कि आज 5000 /2000 / 1500 पूर्व का जीवन जीने की ज़रूरत है। परलोक के बारे में इस जीवन के बाद उस जीवन में और कोई चेतना है तो उसके बारे में अपनी धारणा स्वयं बनाइये। कोई ज़रूरत नहीं है किसी पुरुष किसी मनुष्य किसी राजा के रूप में उसे देखें। न ही इस भुलावे में रहें कि अगर हमारा अस्तित्व है तो हम ऐसे ही भौतिक शरीर में चिर युवा और सुंदरता के साथ रहेंगे खाये पिएंगे और यौन सुख प्राप्त करेंगे। संगठित धर्म उस समय की राजनीति थे - सीमित संसाधनों के साथ लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाया गया और सत्ता वर्ग ऐशो -इशरत का जीवन जीता रहा - ऐसा जीवन जो आम लोगों को धार्मिक बने रहने पर परलोक में मिलेगा। आज ज़रूरत है हम अपने को धर्म गुरुओं , धर्म पुस्तकों औ...

आस्था न हो , धर्म हो

आस्था के नाम पर यहूदियों , ईसाईयों और मुसलामानों ने लाखों करोड़ों बेगुनाह इंसानों को क़त्ल कर दिया - ओल्ड टेस्टामेंट में देखिये यहवह के मानने वालों ने शुरू में तो बॉल और अन्य उपासकों के मर्दों औरतों बच्चों को क़त्ल किया बार बार यहवह कह रहा है किसी को जीवित न छोड़ना और उनके जानवरों को भी जीवित न छोड़ना उनकी संपत्ति को भी जला कर राख कर देना। एक जगह जब इनके ही एक भाई ने कहीं से कुछ क़ीमती चीज़ उठा ली और छुपा ली तो उसके पूरे वंश को पत्थरों के ढेर में दबा दिया गया। अगली स्टेज में औरतों मर्दों बच्चों का तो संहार किया गया लेकिन सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा करने की यहवह ने अनुमति दे दी और अगली स्टेज में पुरुषों लड़कों को क़त्ल किया गया लेकिन संपत्ति औरतों और लड़कियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया - जो होता रहा सब यहवह के आदेश से जो यहूदियों को नबियों के ज़रिये पहुँचता था। ईसाईयों ने दूसरे धर्म के लोगों को तो लूटा क़त्ल किया सम्पत्ति से बेदखल किया अपनों में भी इन्क्विज़िशन में आस्था में विकृति मिलने वालों को मार डाला जला डाला जोअन ऑफ़ आर्क को भी जला कर मार डाला वैज्ञानिक ब्रूनो को भी जला कर मार डाला और कितनी औरतों को वि...

आज 1400 वर्षों बाद

आज हम कह सकते हैं कि अल्लाह हो या न हो , मुहम्मद अल्लाह के रसूल हों न हों , फैसले का दिन हो न हो , जन्नत जहन्नम हो न हो हमें ज़िन्दगी भर नेकी के रास्ते चलना है बराबरी भाईचारा और अमन क़ायम करना है। 1400 वर्ष पूर्व अरब के पुरुष प्रधान क़बायली समाज में लोगों को नेकी की राह चलाने के लिए हज़रत मुहम्मद ने फैसले के दिन ईमान लाने पर ज़ोर दिया - अल्लाह है और वह अल्लाह के रसूल हैं यह मुख्य बात नहीं थी - फ़ैसले के दिन सतकर्म करने वालों को हमेशा के लिए जन्नत के बाग़ मिलेंगे और दुष्कर्म करने वालों को जहन्नम की आग मिलेगी - यह मुख्य धारणा दी गयी। भारत में महात्मा बुद्ध ने सिर्फ मोक्ष की बात कही किसी आस्था की अलग से बात नहीं कही। दुनिया भर में करोड़ों अरबों आम मुसलमान इन 1400 वर्षों में नेक ज़िन्दगी जी रहे हैं और इनके 5 गुना इंसान जो मुस्लिम नहीं हैं वे भी नेक ज़िंदगी जी रहे हैं। देखना यह है कि जो मुसलामानों में ख़ास इंसान थे उन पर इस ईमान का क्या प्रभाव पड़ा ? जब हज़रत मुहम्मद का आखिरी समय आया : बिलकुल अंत समय में जब ज़ोर ज़ोर से विवाद चल रहा था तो हज़रत मुहम्मद ने कहा कागज़ क़लम लाओ में वसीयत लिख दूँ तो उमर ने क...

मुसलमान आज भी क़बीला - युग में

जंगल में ही और जंगल से निकल कर खाना बदोश स्टेज में हम क़बीले के रूप में रहते थे और आज भी जब कोई शादी वगैरा होती है और सारे परिवार इकट्ठे होते हैं तो परिवार पिघल जाते हैं क़बीला बन जाता है - मर्द मर्द एक साथ औरतें औरतें एक साथ बच्चे बच्चे एक साथ। क़बीले में सब लोग सरदार की बात मानते हैं अपने विवेक को पीछे कर देते हैं। दुनिया के अधिकाँश लोग व्यक्ति बन कर रह रहे हैं हर बात खुद सोचते समझते हैं लेकिन अधिकाँश मुसलमान व्यक्तित्व विहीन हैं - मुसलामानों के सरदार हज़रत मुहम्मद हैं - क़ुरान उनसे मिला और उसके इलावा उन्होंने जो कहा जो किया उसे हदीस कहते हैं - सारे मुसलमान उसको मानते हैं या उसी को उद्धरित करते हैं करें चाहे कुछ भी। उनके बाद प्रथम तीन खलीफा जिन्होंने इस्लाम को हाईजैक किया वे सुन्नी मुसलमानों के सरदार हैं और हज़रत मुहम्मद के वंशज 12 इमाम शिया मुसलामानों के सरदार हैं। वक़्त के हिसाब से सुन्नी और शिया मौलवी हदीसें बयान करते हैं या गढ़ते हैं और मुसलमान उनके अनुसार अनुपालन करते हैं या उन्हें उद्धरित करते हैं - सोशल मीडिया पर लगातार यही चल रहा। ब्रिटिश काल के अंतिम समय में काफी मुसलमान प्...

विवादित स्थलों पर फैसला

जितने भी देश में विवादित स्थल हैं उन पर एक जुडिशियल कमीशन बना कर फैसला करा लिया जाए। लेकिन संघ द्वारा इसके बाद भी मुस्लिम समुदाय को चैन से रहने नहीं दिया जाएगा क्यूंकि असली रोग कुछ और है जिसका ज़िक्र और इलाज बाद में बताऊंगा। हिन्दू मुस्लिम विवाद कि मुख्य वजह दोनों की मानसिक परतंत्रता है - दोनों में अधिकतम लोगों के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं हुआ है और अगर यह अपना रोग पहचान कर अपने को ठीक नहीं करते तो विकास के सिद्धांत से इन दोनों का धरती से उठ जाना ही मानव जाति के हित में होगा - किसी प्राकृतिक आपदा द्वारा महाविनाश। वैसे तो पूरी मानव जाति महाविनाश के कगार पर पहुँच चुकी है किन्तु हर देश में अनेक स्त्री पुरुष ऐसे हैं जिनका अस्तित्व मानव जाति और प्रकृति के लिए उपयुक्त है। मुसलमान अपनी मानसिक परतंत्रता के कारण कट्टरवादी है और वह उनको अनुसरण करता है जो उसे कटटर बनाते जा रहे हैं - अनेक मौलवी और अनेक शिक्षित स्त्री पुरुष जो सोशल मीडिया पर धार्मिकता को बढ़ावा दे रहे हैं। हिन्दू अपनी मानसिकता परतंत्रता के कारण मुस्लिम दुश्मन और जातिवादी हैं - उनकी मुस्लिम दुश्मनी संघ और उससे जुड़े साधु साध्व...

21 वीं शताब्दी में कांग्रेस के इलावा कोई विकल्प नहीं !

शिक्षित हिन्दुओं और मुसलमानों को समझ लेना चाहिए कि देश के विकास समृद्धि के लिए कांग्रेस के इलावा कोई विकल्प नहीं है - देश को ज़रूरत है वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सभी लड़के लड़कियों को शिक्षा , विज्ञान , कला , संगीत , स्पोर्ट्स आदि में बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए और आपसी रज़ामंदी से जीवन साथी चुनने का अधिकार होना चाहिए। सम्प्रदायिक , जातिवादी और कटटरवादी सोच वाले नेता और पार्टियां देश के लिए कितनी नुक्सानदह हैं अगर आपकी आँख अब भी नहीं खुली तो आप स्वयं देश के दुश्मन हैं। यहीं कांग्रेस को भी दो निर्णय लेने चाहिए : 1 गुंडों अपराधियों कटटरवादियों को पार्टी में कोई स्थान नहीं होगा 2. पार्टी में वही लोग होंगे जो इंसान को इंसान समझते हैं जिनके मन में दलितों आदिवासियों अल्प संख्यकों महिलाओं LGBT के लिए कोई दुर्भावना नहीं है

मध्यकालीन / साम्प्रदायिक विवादों में सब का बह जाना ठीक नहीं !

आज 21 वीं शताब्दी में हम जिन विवादों में फंसे हैं उनसे बाहर निकल आने की ज़रूरत है जिसमें वर्तमान में हम एक अच्छा देश अच्छा समाज बनायें। सभी मानवतावादी लोगों की तरह हमें भी इस बात के लिए खड़ा होना चाहिए कि हमारे देश में मृत्यु दंड समाप्त हो जाना चाहिए। दूसरी ज़रूरी बात है कि जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार होता है तो उसके जुर्म के आधार पर मजिस्ट्रेट को रिहाई की तारीख भी लिख देनी चाहिए या उस तारीख के पहले किसी अदालत से उसे या तो छोड़ दिया जाए या दंडित कर दिया जाए तो उस दंड के अनुसार उसकी रिहाई होगी। हर वर्ष हर क़ैदी को 7 दिन का पेरोल मिलना चाहिए - केवल कुछ लोग जो समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं उन्हें इस सुविधा से वंचित करना पड़ सकता है। बहुत से युवक युवतियों को कुछ लिखने बोलने की वजह से वर्षों से जेल में सड़ाया जा रहा है जो अत्यंत अमानवीय है - काफी लोगों को उनके घर में ही घर वालों की ज़िम्मेदारी पर नज़र बंद किया जा सकता है। काफी लोगों को अलग किसी भवन में एकांत में रखा जा सकता है जिन्हें घर से खाना कपड़े की सुविधा दी जा सकती है। कुछ को पति / पत्नी के साथ रहने की भी सुविधा दी जा सकती है। जुर्म के आधार ...

मुसलामानों को चाहिए भारत के यथार्थ को समझें !

आज कल के हालात से परेशान हो कर शिक्षित मुस्लिम मित्र या तो हताश निराश हो कर जज़्बाती बातें लिख रहे हैं या विपक्षियों को चिढ़ाने वाली पोस्ट डाल रहे हैं - दोनों ही सोच पराजय की और ले जाती हैं - जीवन संघर्ष का नाम है जो सत्य पर हैं विजय उनकी ही होनी है। भारत में आधुनिक सभ्यता के संस्थापक महात्मा बुद्ध हैं - इनका नाम कपिलवस्तु था और कुछ लोगों का अंदाजा है क़ुरान में जिन ज़ुलकिफ़्ल का ज़िक्र है यही हैं। महात्मा बुद्ध ने जीवन जीने का ढंग सिखाया था। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित साम्राज्य की स्थापना और इनकी शिक्षाओं का दूर दूर प्रसार सम्राट अशोक ने किया था और उनके बाद सम्राट हर्ष वर्धन ने किया था। इसके बाद जब भारत में मुसलमान शासन स्थापित हुआ तो आपसी मतभेद खत्म करने और अच्छी ज़िन्दगी जीने की शिक्षा देने के लिए महात्मा कबीर और नानक देव ने समाज को एक सूत्र में बाँधा। ब्रिटिश काल की गुलामी के अंतिम चरण में गाँधी , नेहरू और डॉ अम्बेडकर ने भारत राष्ट्र का निर्माण किया। धीरे धीरे पतन होता गया - अब बौनों का ज़माना है - झूठे घटिया मानसिकता के लोग यह ज़माना बीतेगा हमें निरंतर संघर्ष रत रहने ...

कुऍं से बाहर निकलिये बाहरी दुनिया देखिये

दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है कहीं कोई तानाशाह कहीं कोई कम्युनिस्ट कहीं कोई मुल्ला - आज की दुनिया ऐसे नहीं छोड़ी जा सकती - कोई किसी का आंतरिक मामला नहीं है - हर जगह प्रजातंत्र होना चाहिए और हर जगह चुनाव सिस्टम और प्रोसेस पर पूरी दुनिया की नज़र होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक जुट होने की ज़रूरत है। वर्ष में एक दिन जन दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए जिस दिन दुनिया के हर शहर में सारे स्त्री पुरुष घरों से निकलें और मार्च करते हुए एक केंद्रीय स्थल पर जायें और घोषणा करें हम शासक हैं और हम सब बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं।

कौन है असली शासक ?

सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं। इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है ! इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है।

मानव अधिकार एक्टिविस्ट इसराअ का सऊदी हुकूमत द्वारा क़त्ल

एक निर्दोष महिला इसरा अल गमाम जो मानव अधिकार के लिए लिखती थी उसको आज 21 वीं शताब्दी में मध्यकालीन बर्बर तरीके से सर काट दिया गया। आज सभ्य समाज मृत्यु दंड समाप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है तो मानवता के दुश्मन इस्लामिक हुकूमतें बर्बर तरीके से मृत्यु दंड दे रही हैं - इस्लामी क़ानून में सिर्फ क़त्ल की सज़ा क़त्ल है और इसमें भी अगर मक़तूल के वारिस खून के बदले धन ले कर माफ़ कर दें तो अनुमन्य है - लेकिन दुनिया भर के मुसलामानों को न इस्लाम से मतलब है न मानवता से - कोई चूं भी नहीं करेगा - सऊदी अरब और ईरान दोनों मृत्यु दंड और अधिकारों स्वतन्त्रता की बात करने पर निर्दोष स्त्रीयों पुरुषों को जेलों में सड़ा रहे हैं। दुनिया भर में हर देश में मानव अधिकार स्थापित होने चाहिए और कहीं भी राज तंत्र धर्म तंत्र और तानाशाही नहीं होनी चाहिए - ये किसी भी देश का आंतरिक मामला नहीं है बल्कि पूरी मानवता का मामला है।

निर्दोष राहुल भट्ट की आतंकियों द्वारा निर्मम हत्या

आप हमेशा यही पाएंगे कि जब जब देश के नफ़रतियों को मदद की ज़रूरत होती है कश्मीर के आतंकी कोई न कोई घटना कर देते हैं - शायद दोनों की नकेल एक ही हाथों में है। चाहे पुलवामा काण्ड हो या यह निर्दोष राहुल भट्ट की हत्या - हम दुःख और संवेदना व्यक्त करते हैं उनके शोक संतृप्त परिवार से उनकी युवा पत्नी और 6 वर्ष की बेटी से। जब विवेक अग्निहोत्री जनित उन्माद धीमा पड़ने लगा था तो मानवता के दुश्मनों नफरत की नाली में बिजबिजाने वाले कीड़ों ने यह काण्ड कर के विवेक अग्निहोत्री जनित उन्माद को ऊर्जा देने का प्रयास किया है क्यूंकि राहुल भट्ट की हत्या से कश्मीर के अलगाववाद को तो कोई लाभ मिलने नहीं जा रहा है हाँ जो प्रजातंत्र और सद्भाव स्थापित करने के प्रयास कर रहे थे उनके ऊपर ज़रूर थूक दिया गया है। लेकिन नफरत हारेगी मुहब्बत जीतेगी - सत्यमेव जयते

शिक्षित मुसलामानों को 1400 वर्ष पुराने सिस्टम से बाहर निकल आने की ज़रूरत है

यह तो सच है कि जब हम चेतन हैं तो एक सर्वव्यापी अनादि अनंत चेतना भी है जिसे विभिन्न धर्मों ने अपने अपने समय में व्याख्या की लेकिन कोई पूर्ण नहीं क्यूंकि हम पूर्ण नहीं हैं विकासशील हैं इसलिए यह व्याख्या बदलती रहेगी और समय के साथ हमारी सामाजिक व्यवस्था क़ानून भी बदलता रहेगा। 1400 वर्ष पूर्व लोगों को सीधे रास्ते चलाने के लिए डर और खुशखबरी का सहारा लिया गया - आग और बाग़ का तसव्वुर पेश किया गया। उस समय चोरी और पत्नियों द्वारा पति को धोखा देना सबसे गंभीर मसला था इसलिए चोर का हाथ काटने और ज़िना करने वाले को कोड़ा मारने के लिखित क़ानून के बजाये पत्थर मार कर मारना ज़्यादा उपयुक्त समझा गया। औरतों को परदे में रखा गया। आज यह सब कोई गंभीर अपराध नहीं हैं आज तो अंतर्राष्ट्रीय अपराधों का युग है जिसके आगे सरकारें या तो विफल हैं या खुद शामिल हैं। अगर हमारा इस जीवन के बाद कोई अस्तित्व है तो वह हमारी चेतना है - अगर हमने प्यार दया सहानुभूति का रास्ता चुना तो हम प्रसन्न रहेंगे और यही जन्नत होगी और अगर हमने नफरत हवस अहंकार का रास्ता चुना तो हम कष्ट में रहेंगे और यही जहन्नम होगा - बाक़ी तो मरने के बाद मालूम पड़ेग...

मुस्लिम मित्रों को कुछ समझने की ज़रूरत है !

पेंडुलम पहले दाएं बाएं होता है फिर संतुलन में आता है - यही इतिहास में होता है। आज समय है मध्यकालीन गलतियों को दूर करने और पुराने ज़ख्म भरने का फिर समय आएगा प्राचीन काल की गलतियां दूर करने और ज़ख्म भरने का। इतिहास की धारा के विरुद्ध मत खड़े होइए। यह सही है अंग्रेज़ों ने इतिहास में रद्दोबदल कर के हिन्दू मुस्लिम वैमनस्य पैदा किया लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है मुस्लिम शासकों ने स्वयं अपने काल का इतिहास लिखवाया है। बाबर ने स्वयं लिखा है कि उसने इब्राहीम लोधी की माँ को अपने महल में रखा था फिर साज़िश करने के जुर्म में हाथी के पैरों टेल कुचलवाया था। क्या इतनी निर्दयता उचित थी ? जहांगीर ने खुद लिखा था कि वह शिकार खेलने गया था तभी एक बरात जंगल से गुज़री और शिकार भाग गया तो उसने दूल्हा और बारातियों को बेदर्दी से क़त्ल कराया। यह मुस्लिम शासक इतने ज़ालिम थे किसी को छत से फैंकवाने , किसी लो उबलते पानी में डलवाना किसी की खाल उतरवाना - सब खुद लिखा है। जहांगीर ने गुरु अर्जुन सिंह को इसलिए क़त्ल कराया कि उन्होंने खुसरो को पनाह दी थी। औरंगज़ेब ने गुरु तेग बहादुर और उनके दो बेटों को क़त्ल कराया। जिन लोगों ने ...

समय आ गया जाति को अलविदा कहिये !

हम सब अपना एक नए तरह का नाम रखना शुरू कर दें : अपना नाम + अपनी माता का नाम + अपने पिता का नाम इस तरह मेरा नाम ही Mansoor Shahar Murtaza फिर हम अपने नाम से vowels निकाल कर पुन : AEIOU के क्रम में लगा दें मेरा नाम बन जाता है Manesiro Shaheri Maretizo नेट पर मेरा यही नाम है अपने बच्चों का नाम इस तरह रखना शुरू कर दीजिये बच्चे कभी पूछें हमारी जाति क्या है तो कहिये हमारी जाति इंसानियत है - पुराने ज़माने में पेशे खानदानी होते थे तब जाति होती थीं अब दुनिया में ऊंचा उठना है तो शिक्षा में ऊँचा उठना होगा और जिन्हें विशेष टैलेंट है उसके अनुसार उन्हें कला संगीत साहित्य स्पोर्ट्स सोशल वर्क में ऊंचा उठना होगा। फिर चाहें तो जाति बता दीजिये। बच्चे पूछें हमारा धर्म क्या है बताइये सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। सब धर्म बराबर हैं अच्छाई सिखाते हैं पर मानने वालों ने धर्म के नाम पर बहुत गलत किया है। फिर चाहें तो अपना धर्म बता दें।

आईये एक नयी दुनिया बनायें - प्रेम अहिंसा और सहयोग से

अब तक का इतिहास युद्ध संघर्ष नर संहार बलात्कार गुलामी अन्याय हिंसा दमन से भरा है और शायद ही कोई उज्ज्वल भविष्य की कल्पना भी कर सके लेकिन यह उज्ज्वल भविष्य साकार हो सकता है अगर हम जागृत हो जायें और जागृति फैलायें। पहला सत्य यह है कि हम सब सिर्फ इंसान हैं और हम सब की इस दुनिया इस जीवन में एक सी ज़रूरतें हैं और इन ज़रूरतों की पूर्ति का स्रोत यह प्रकृति है यह धरती है। इससे कुछ भी प्राप्त करने के लिए मानव श्रम , बुद्धि और कौशल की ज़रूरत है। यह श्रम और कौशल हम सब मिल कर कर सकते हैं इसी को बल पूर्वक प्राप्त करने के लिए लोगों को गुलाम बनाया गया और प्राकृतिक सम्पदा को लगातार लूटा जा रहा है। दुनिया के सभी स्त्री पुरुष 25 वर्ष की आयु से 75 वर्ष के केवल 4 घंटे काम कर के साप्ताहिक अवकाश और वर्ष में एक महीने का अवकाश भी उपभोग कर के सभी की ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं। हम जो काम करते हैं वे तीन स्तर के होते हैं : 1 धरातल पर कार्य जिसमें हम अपने श्रम बुद्धि और कौशल का प्रयोग करते हैं जैसे कृषि या कारखाने में काम जैसे डॉक्टर शिक्षक का कार्य जैसे कला संगीत आदि 2 विकास एवं रिसर्च : इसमें विभिन्न क्षेत्रों ...

सन्मार्ग पर चलिए - अपना जन्म / परलोक बचाइए

आज के सोशल मीडिया के युग में तरह तरह की पोस्टों की भरमार है ऐसे में अपनी सन्मति को बचाये रखने की बहुत ज़रूरत है। 1 सत्य : सत्य वही है जो विज्ञान ने तथ्य प्राप्त किये हैं और जो हम अपनी बुद्धि विवेक से प्राप्त करते हैं। धर्म के नाम से जो प्राचीन और मध्य काल में मान्यताएं थीं उनको सामने लाने की ज़रूरत नहीं है। हम सब इंसान हैं - नस्ल जाति या धर्म का कोई भेद नहीं है। 2. धर्म : पूजा या नमाज़ , व्रत या रोज़ा , तीर्थ या हज्ज और दान या ज़कात यही हर धर्म के अंग हैं इनसे अतिरिक्त धर्म नहीं है - अपने धर्म को फैलाना दूसरों को अपने धर्म में लाना यह सब मध्यकालीन राजनीति थी। 3 प्रेम अहिंसा : अपने व्यवहार बातचीत में हमें प्रेम और अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए - यदि इस जीवन के बाद कोई अस्तित्व है तो वह हमारे इस जीवन के कर्म विचार और भावना पर निर्भर करेगा अगर हम यहां हवस और नफरत के साथ जी रहे हैं तो इनसे नहीं हो पाएंगे इसलिए अभी से हवस और नफरत का रास्ता छोड़ दीजिये। 4 सादगी : ओद्योगिक उत्पादनों से बचिए - कृषि उत्पादन लघु उद्योग की चीज़ें इस्तेमाल करिये। बड़े उद्योग से प्रदूषण हो रहा है और अरब पति से ख...

सत्ता का झूठ और दौलत का झूठ

मानव जाति अपने लगभग 10000 वर्षों के सभ्यता के सफर में अपने बनाये दो झूठ या अपने बनाये दो भूतों से बहुत कष्टों में है -सत्ता और दौलत । सत्ता और दौलत ( धन का स्वामित्व ) तभी तक है जब तक 7 अरब इंसान इनको मानते हैं जिस दिन वे सत्य को अपनी आंखें खोल कर देखेंगे ये दोनों भूत विलुप्त हो जाएंगे। सत्य यह है कि 7 अरब लोगों की ज़रूरतें हैं - उन्हें रोज़ खाना पानी चाहिए ( हवा रौशनी का स्वामित्व किसी को देना अभी संभव नहीं है ) सबको कुछ कपड़े और परिवार के साथ रहने के लिए मकान चाहिए घरों में रौशनी खाना पकाने ठंडा गर्म करने के लिए ऊर्जा और उपकरण चाहिए। आने जाने के लिए यातायात के साधन चाहिए आपस में बातचीत जानकारी ख़बरों के लिए संचार माध्यम चाहिए और चिकित्सा स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था चाहिए। सभी ज़रूरतों को पूरा करने की सामग्री प्रकृति देती है जिसका उपयोग मानव श्रम और बुद्धि व कौशल से पूर्ण हो पाता है। शुरू से यह संभव था कि सभी लोग मिलजुल कर सबकी ज़रूरतें पूरी करते।लेकिन मनुष्यों ने अपने ऊपर किसी को अपना हाकिम - प्रधान , राजा , बादशाह , सम्राट और अब राष्ट्रपति प्रधान मंत्री बना लिया। इन लोगों ने प्र...

मार्क्स नहीं , भारतीय संस्कृति में है मुक्ति

आज का युग निरंकुश पूँजीवाद का है - सरकारी उपक्रम बिक रहे हैं , मंहगाई बढ़ती जा रही है और हिन्दू मुस्लिम किया जा रहा है - सत्ता और पूंजीवादी मैत्री और रिश्तेदारी से जुड़ गए हैं एक दूसरे को बेहिचक लाभ पर लाभ पहुंचा रहे हैं। प्रजातंत्र के दो स्तम्भ - मीडिया खरीदा जा चुका है न्यायपालिका में कभी सत्ता के समर्थक बैठेंगे तो बात आसान है अगर जनता के हितेषी बैठेंगे तो उन्हें बाक़ी तीन मिल कर आसानी से निष्प्रभावी बना देंगे। मार्क्स नहीं , भारतीय संस्कृति में है मुक्ति रास्ता किधर है ? क्या किसानों मज़दूरों आदिवासियों छात्रों को आधा कच्चा पक्का मार्क्सवाद दे कर लाठी गोली और जेल का भाग्य दें ? चीन में कम्युनिज्म स्थापित हुआ फिर वह स्टेट कैपिटलिज्म बन गया दौलत के लिए अंधे हो कर इतना उत्पादन कर रहे हैं कि इनके शहर प्रदूषित हो गए हैं और इतने निर्दयी हैं कि कोरोना फैलने पर बहुत कठोर प्रतिबंध लगा रहे हैं। दस लाख उइघर मुस्लिमों को आइडियोलॉजी के आधार पर बंद कर रखा है और उनके अंगों को ट्रांसप्लांट के लिए अमीर मरीज़ों को बेच रहे हैं। हम भारतवासी अपनी संस्कृति भूल कर उपभोग के रास्ते चल पड़े हैं नतीजे में हम...