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Showing posts from April, 2022

नमाज़ और पूजा एक साथ

हॉस्टलों में , सेना के कम्पों में , अस्पतालों में , जेल की बैरकों में बॉर्डर पर हर जगह आस्तिक हिन्दू और आस्तिक मुस्लिम बिना किसी परेशानी के साथ साथ इबादत करते आ रहे हैं। देश भर में अनेक ऐसे धर्म स्थल हैं जहां सभी धर्मों की इबादतें चल रही हैं। हमें भी चाहिए अपनी मस्जिदों और मंदिरों को सब के लिए खोल दें। नए धर्म स्थल ऐसे बनाये ही जायें जिसमें सभी धर्मों के लोग अपने अपने ढंग से इबादत कर सकें और अगर विभिन्न धर्म मानने वाले विवाह करें तो एक घर में रहते हुए अपना अपना धर्म मानते रहें।

मुसलामानों राजनीति का मोह छोड़ो !

एक तरफ बात करते हैं तौहीद की और आख़िरत की दूसरी तरफ आपके मौलवी और लीडर लपकते हैं सत्ता पर बैठे लोगों और टी वी चैनलों की तरफ। क़ौमें यहां और भी हैं -सिक्ख ( पंजाब के बाहर के ) ईसाई पारसी यहूदी एंग्लो इंडियन और जाने कितनी क़ौमें किसी को राजनीती से कोई सरोकार नहीं और आपको शिकायत है कि भाजपा के 303 एम् पी में एक भी मुसलमान नहीं है। क्या किसी इस्लामिक मुल्क में राजनीति की इजाज़त है ? क्या भारत में मुस्लिम रूल में किसी को राजनीती की इजाज़त थी ? यह दोगलापन ब्रिटिश हुकूमत ने 1857 के बाद शुरू किया। तब भी क़ौम के हमदर्द लोगों ने यही सिखाया मुसलामानों आधुनिक शिक्षा हासिल करो। धरना प्रदर्शन जुलूस नारेबाजी पत्थरबाज़ी का रास्ता छोड़ दीजिये। फेसबुक पर भी कठोर शब्द मत इस्तेमाल कीजिये। सिर्फ साइलेंट वोटर बन जाईये। 80 प्रतिशत हिन्दुओं को देश का वर्तमान और भविष्य निर्धारित करने दीजिये - ऐसे रहिये जैसे आप हैं ही नहीं। साइंस और टेक्नोलॉजी में आगे बढिये - देश विदेश की बड़ी बड़ी इंस्टिट्यूट तक पहुंचिए अगर आप ने कोई बड़ी खोज कर ली तो क़ौम असली भला होगा। अज़ीम प्रेमजी जैसे उद्योगपति बनिए। स्पोर्ट्स कला साहित्य मे...

मुसलामानों Confrontation और provocation के रास्ते पर मत चलो

हम सब जानते हैं लाउड स्पीकर पर अज़ान देना कोई मज़हबी हक़ नहीं है जब तक पड़ौसी इजाज़त दे तभी तक हम अपना मज़हब दूसरों की नज़रों उनकी समाअतों तक पहुंचा सकते हैं। एक वीडियो यह दिख रहा है किसी जगह लाउड स्पीकर बंद करा दिया गया तो सड़क पर मुसलमान थोड़ी थोड़ी दूर पर खड़े हो कर तेज़ आवाज़ में एक साथ अज़ान दे रहे हैं - सड़क पर बिना इजाज़त नमाज़ तो पढ़ ही रहे थे अब बिना इजाज़त अज़ान भी दे रहे हैं - यह है Confrontation और provocation का रास्ता। क़ुरान कहता है अपने को हलाकत में मत डालो - यह गुंडों पुलिस को मौक़ा दे रहे हैं इन्हें मारें या गिरफ्तार करे। न अपनी फ़िक्र है न अपनों की फ़िक्र। यह क्या है ? पॅलेस्टिन यहूदियों का मुल्क था - मिस्र से निकल कर बनी इजराइल 40 वर्ष तक भटकते रहे उन्हें अपनी ज़मीन नहीं मिली हज़रत मूसा की ज़िन्दगी में भी नहीं उनकी वफ़ात के बाद उन्हें पॅलेस्टिन में बसना मिला। ज़िल्लत और रुस्वाई उनके पीछे लगी रही - रोमन ने उन्हें फिर मुल्क बदर कर दिया। फिर एक बार वापस बसे फिर शायद ईसाइयों ने उन्हें निकाल फेंका। उसी के बाद इस्लाम आया और ताक़तवर बना तब मुस्लिम कमांडर ने जेरूसलम में एक मस्जिद तामीर की औ...

पुरखों की रीत - भूलते भटकते मुसलमान

1947 में जब हिंदुस्तान में ठहरने का फैसला किया था तो हिन्दुओं के साथ रहने का फैसला किया था न कि अलग थलग रहने का। गाँव क़स्बे मोहल्ले सभी में हिन्दू मुसलमान साथ रहते थे और जीने का ढंग यह था " बा मुसलमान अल्लाह अल्लाह , बा ब्रह्मण राम राम " राम राम और सलाम पर्यायवाची थे। मेरे माँ बाप ने ज़िन्दगी भर पाबन्दी से 5 वक़्त नमाज़ पढ़ी और रमज़ान में महीने भर रोज़ा रखा। हम लोग दशहरा में पाबन्दी से राम लीला देखने जाते थे और जन्माष्टमी में पड़ौस में हर हिन्दू परिवार में सजी झांकी देखने जाते थे। मेरी एक हिन्दू बहन थी जो हमेशा राखी भेजा करती थी। होली में हम लोग शामिल हो कर रंग खेलते थे और दिवाली में दिए जलाते थे। सत्य नारायण की कथा में हम लोग भी जाते थे जय जयकार करते थे सत्तू फलों का प्रसाद लेते थे। मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में कई के साथ एक थाल में खाना खाया। 1984 में बंगलोरे साइंस कांग्रेस में गया था मुझे मौसम का अंदाजा नहीं था पतली चादर ले गया था प्रोफेसर चतुर्वेदी उसी कमरे में थे उन्हीं के साथ सोया और वह उतने जाड़े में सुबह सवेरे नहा कर पूजा करते थे। आज़ादी की लड़ाई में सभी हिन्दू मुस्लिम ऐसे ही...

आप तो आप , आपका पूरा वंश ख़त्म हो सकता है

इस बात को समझने के लिए कल्पना कीजिये कि दुनिया के 10 खरबपतियों में आप एक हैं और दुनिया की 70 प्रतिशत दौलत के आप दस लोग ही स्वामी हैं। दुनिया में बढ़ते प्रदूषण रेडिएशन ग्लोबल वार्मिंग का आप हल ढूंढना चाहते हैं और आप उस खतरे को भी हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं कि कभी यह नंगे भूखे मिडिल क्लास के नेतृत्व में अपना हक़ न मांगने लगें। एक तो यह होना चाहिए कि दुनिया की आबादी घट कर आधे से कम हो जाए - कोई घातक संक्रमण लैब में विकसित किया जाए - ऐसा किया गया पर यह अनियंत्रित हो गया आपके अपनी नस्ल के लोग ही ज़्यादा प्रभावित हुए और गरीब आदिवासी या तो संक्रमित नहीं हुए या शीघ्र स्वस्थ हो गए। बहतर उपाय यह है कि ऐसी वैक्सीन विकसित की जाए जो लोगों को बाँझ बना दे - लोग लगवायेंगे ही नहीं - उनसे कहा जाए यह वैक्सीन महामारी pandemic रोकने के लिए ज़रूरी है। दुनिया की आबादी आधी करने के लिए उपयुक्त होगा ऐसी वैक्सीन अफ्रीका एशिया के लोगों को लगाई जाए बाक़ी लोगों को वास्तविक रोग निरोधक वैक्सीन लगाई जाए ख़ास कर उन विकसित देशों में जहां राज़ खुल सकता है। दूसरा उपाय है जो चीन कर रहा है किसी बहाने से लोगों को डिटेंशन ...

मुसलामानों क़ाबिले नफरत छवि से बाहर निकलो - मुल्क में मुहब्बत फैलाओ

1922 में ओटोमन साम्राज्य का अंत हुआ और मुसलामानों का पतन शुरू हुआ ब्रिटैन को अरब छोड़ कर हटना था तो उन्हें किसी को तो सत्ता सौंपनी थी - मक्का मदीना में शरीफ परिवार की सत्ता थी उन्होंने ब्रिटैन के इजराइल प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। देहात क्षेत्रों में सऊद का वर्जस्व था उसने इजराइल प्रस्ताव स्वीकार किया तो 1920 में ब्रिटैन ने उसे पूरे अरब का बादशाह बना दिया और मुहम्मद सल्ले ० का अरब सऊदी अरब बन गया और दुनिया भर के मुसलामानों को इससे कोई आपत्ति भी नहीं हुयी। सऊद ने इब्ने वहाब से किये मुआहिदे को पूरा करते हुए वहाबी इस्लाम को अरब का मज़हब बनाया और दुनिया भर में इसी इस्लाम को फैलाया। तेल निकल आया था पैसे का इस्तेमाल कर के वहाबी इस्लाम को फैलाया - आम मुसलामानों को अली फातिमा हसन हुसैन से दूर करना मक़सद था अज़ादारी को ख़त्म कराना मक़सद था। उधर 1925 से एक संगठन लगातार मुसलामानों के खिलाफ नफरत फैला रहा है। हिंदुस्तान के अधिकाँश पढ़े लिखे मुसलमान वहाबी होते गए और जब मिडिल ईस्ट में जॉब मिलने लगे तो आम घरों के लोग भी वहाबी हो गए - मस्जिदों का निर्माण या विस्तार ऊंचा करना लाउड स्पीकर लगाना और गा...

मुसलामानों कट्टरवाद छोड़ो- 3

क़ुरआन और हदीस से गलत दीन बना कर ख़लीफ़ाओं , बादशाहों और सेना बना कर दूसरे मुल्कों पर हमला करने के लिए और अब आधुनिक समय में कट्टर आतंकवादी संगठन - तालिबान , आई एस आई एस , बोको हराम आदि द्वारा मुसलामानों को मानवता और सभ्यता के दुश्मन के रूप में खड़ा कर दिया गया है और दुनिया कहने लगी है - हर आतंकवादी मुसलमान होता है और दुनिया भर में अनेकों संगठन और अनेको मर्द औरत सोशल मीडिया और टी वी चैनलों पर लगातार मुसलामानों और इस्लाम पर नफरत भरे बोल बोल रहे हैं। आज क़ुरान का अनुवाद हर मुल्क में अनुवाद मौजूद है और शायद मुसलामानों से ज़्यादा ग़ैर मुस्लिम क़ुरान को पढ़ रहे हैं। कोई भी लड़का लड़की क़ुरान पढ़ कर यही निष्कर्ष निकालेगा : तीन तरह के लोग हैं - मुस्लिम , काफिर और मुशरिक। काफिरों से लड़ो उन्हें क़त्ल करो। मुशरिकों से लड़ो उन्हें क़त्ल करो। इसका मतलब मुस्लिम के इलावा बाक़ी लोग काफिर मुशरिक हैं उनसे लड़ो क़त्ल करो। यही पढ़ कर युवा आतंकवादी हो रहे हैं और आतंकवादी संगठन खड़े हो रहे हैं। क्या घोड़े पर बैठ कर तलवार ले कर काफिर मुशरिक से लड़ सकते हैं। काफिरों मुशरिकों ने मिडिल ईस्ट में तेल खोज निकाला मिल्कियत मुसला...

मुसलामानों कट्टरवाद छोड़ो-2

लोग संस्कृति या कल्चर को ही धर्म समझ लेते हैं इस वजह से भी दुनिया में बहुत अशांति है। धर्म सिर्फ पूजा या नमाज़ , व्रत या रोज़ा , तीर्थ या हज्ज और दान या ज़कात है। इसी पर आईये कोई न टकराव की बात है न किसी बाहरी प्रदर्शन की ज़रुरत है। मुसलमान तलवार ले कर दुनिया रौंदने निकले थे - हिन्दुस्तान में बाबर तोप ले कर पहुंचे थे। श्वेत नस्ल बंदूक और गोली के ज़रिये अमेरिका अफ्रीका एशिया कनाडा ऑस्ट्रेलिया पहुंचा वहाँ पहले रह रहे लोगों को किनारे किया और यह देश अब सब से विकसित श्वेत संस्कृति के देश हैं। इन देशों में ऊपर से हरेक को अधिकार और आज़ादी है। श्वेत नस्ल की खोज से मिडिल ईस्ट में तेल निकल आया और वे अमीर हो गए उन्होंने मुस्लिम संस्कृति स्थापित की दूसरों को वहाँ अधिकार और आज़ादी तो नहीं है पर वहां नौकरी करने और बहतर वेतन पाने की छूट और सुविधा है। अब भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू और मुसलमान यूरोप और अमेरिका के अधिकार सुख सुविधा का उपयोग करते हैं आगे बढ़ने के अवसर पाते हैं और मिडिल ईस्ट में नौकरी कर के धन कमाते हैं और अपने देश में कट्टर धार्मिक संगठनों को फण्ड करते हैं - लोक भी उनका और परल...

मुसलामानों कट्टरवाद छोड़ो- 1

मुसलमान बार बार मज़हब के नाम से मुख्य धारा से कट जाते हैं जो उनके लिए बहुत घातक है - हिन्दुस्तान में छोटे छोटे पाकिस्तान बना कर रहना समझदारी नहीं है जबकि एक संगठन पिछले 100 वर्षों से निरंतर उनके खिलाफ नफरत और दुष्प्रचार कर रहा है और इस नतीजे में बहुत से पढ़े लिखे लोग - उच्च अधिकारी पुलिस अधिकारी सेना के अधिकारी कॉलेज यूनिवर्सिटी के टीचर डॉक्टर इंजीनियर मीडिया के लोग और जज भी प्रभावित हो कर उसी मानसिकता के हो गए हैं। यह नफरत और दुष्प्रचार झूठा है - गौ वध और उसके मांस का निर्यात इनसे जुड़े लोग करते हैं पाकिस्तान जा कर बिरयानी इनके नेता करते हैं मुस्लिम देशों के सरबराहों से गले इनके नेता लिपटते हैं और देश के संपन्न मुसलामानों से इनके अच्छे सम्बन्ध हैं। सत्य क्या है ? यह फ़ासिस्ट मानसिकता है - संपन्न लोग गरीबों से नफरत करते हैं उनको दबाये रखना चाहते हैं - संपन्न चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम और गरीब हिन्दू या मुस्लिम। मुसलामानों को बदनाम करने के लिए आतंकवादी घटनायें यही करवाते हैं , पत्थरबाज़ी यह कर देते हैं और पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे यह खुद लगवा देते हैं। मुसलमान पिछड़ा बेरोज़गार नि...

संघ को सभी भारतीयों का मित्र और हितैषी बन जाना चाहिए

आज ज़रूरत है संघ को अपनी पुरानी डगर छोड़ कर सभी भारतीयों को भारतीय और देश भक्त समझना चाहिए। आज का मुसलमान किसी भी तरह मुस्लिम आक्रमण कारियों और शासकों के किसी हिन्दू विरोधी कार्यों के लिए ज़िम्मेदार नहीं है और न ही वह देश के विभाजन के लिए ज़िम्मेदार है। देश की अखण्डता और एकता सर्वोच्च है - कश्मीर में जो अलगाववाद है जो पृथककतावादी शक्तियां हैं उनका कुचलना आवश्यक है। पकिस्तान की पुश्तपनाही में जो कट्टरवादी युवा हैं उन्हें मुख्य धारा में लाना ज़रूरी है - उन्हें देश के अन्य स्थानों में शिक्षा और रोज़गार के अवसर दे कर मुख्य धारा में जोड़ा जा सकता है। आज़ादी के पूर्व जो नफरत बढ़ायी गयी उसी के परिणाम स्वरुप देश विभाजित हुआ और फिर गाँधी जी की हत्या हुयी। उसके बाद भी लगातार मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलायी जा रही है। बाबरी मस्जिद के स्थान पर जो राम मंदिर बन रहा है कौन मुसलमान उसके विरोध में आया ? सज्जनता की बात यह है और जो भी विवाद हैं उनके लिए या तो सुप्रीम कोर्ट अपना निर्णय दे या पार्लियामेंट एक्ट पास करे। गौ मांस पर प्रतिबन्ध लगा तो क्या मुसलामानों ने विरोध किया ? गौ वध भी हो रहा है गौ मांस का नि...

नर संहार और भय

यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि घृणा के पीछे भय होता है भय होता है अपनी पहचान छिन जाने का भय होता है आबादी बढ़ा कर जो आज अल्प संख्यक हैं बहु संख्यक हो जाएंगे भय होता है हमारी औरतों का बलात्कार करेंगे या लव जिहाद करेंगे भय होता है हमारा जबरी धर्म परिवर्तन कर देंगे मुस्लिम राष्ट्र बना देंगे यह स्वाभाविक भय हैं और जब एक संगठन जो हिटलर के रास्ते चलता है तो इतिहास की कुछ वास्तविक या मन गढ़ंत बातों को ले कर आम लोगों में नफरत फैलाता है जबकि सद्बुद्धि यह कहती है भला आज के यह लोग उन बातों के लिए कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं। फिर कोई घटना घटित होने के बाद अल्प संख्यक समाज पर इल्ज़ाम लगा कर नर संहार शुरू हो जाता है हालांकि यह उसी संगठन की ही साज़िश हो सकती है - जैसे कि गोधरा काण्ड - अगर कुछ आपराधिक मुसलामानों ने यह जघन्य अपराध किया भी था तो उसके लिए आम मुसलमान कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं ? या किसी लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना चिंगारी का काम कर सकती है। अल्प संख्यक समाज क्या करे ? अल्प संख्यक समाज को सब्र के साथ शिक्षा और रोज़गार में आगे बढ़ना चाहिए। अपने अंदर से कट्टरवाद निकालना चाहिए - राष्ट्र...

भारत के मुसलमान चक्की के दो पाटों के बीच

खुद से या अपने मौलवियों लीडरों के बहकावे में आ कर धर्म की गलत समझ के कारण मुसलमान अलग थलग होते गए अपने गाँव मोहल्ले में बंद होते गए और छोटे छोटे पाकिस्तान बनाते गए और उधर पूंजीपतियों के दलाल देश औने पौने उनके हाथ बेचने वाले एक रणनीति के तहत इस लूटखसोट से जनता का ध्यान हटाने के लिए मुसलामानों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं और मौक़ा पाते पाकिस्तान जा कर बिरयानी खा आते हैं और मुस्लिम देश के सरबराहों के गले लिपटते रहते हैं। मुसलामानों को खुद अपने को इन दो पाटों से निकलना होगा - न कोई मौलवी न कोई मुस्लिम लीडर न कोई सेक्युलर लीडर न कोई अदालत उनकी मदद को आएगी। पहले यह समझ लीजिये आम हिन्दू बहुत अच्छा है आप से उसे कोई नफरत नहीं है और कई ने तो आप के लिए तकलीफें उठायी हैं और उठा रहे हैं। सिर्फ बेरोज़गार युवक हैं जो पैसा और दारु पी कर तलवार ले कर डराने वाले नारे लगाते हैं - और ताज्जुब नहीं उनमें कुछ मुसलमान गुंडे भी हों। जो NRI हिन्दू हैं जो आम हिन्दू के भी गरीबों दलितों आदिवासियों के दुश्मन हैं वे एक संगठन को बहुत पैसा देते हैं इस पैसे का हिसाब उस संगठन को देना होता है इसलिए देश भर में कुछ न कुछ वह ...

आजकल के हालात से परेशान निराश मुसलमान

इस दुनिया में हर मनुष्य को धर्म की ज़रूरत है - धर्म सिर्फ पूजा या नमाज़ , व्रत या रोज़ा , तीर्थ या हज्ज और दान या ज़कात है। मुसलामानों को मौलवियों ने इतना भटका दिया है कि मुसलमान फालतू दिखावे में पड़ गए हैं जो धर्म नहीं सांस्कृतिक आक्रामकता Cultural Aggression है - दाढ़ी हिजाब ढेरों मस्जिदें और उन पर लाउडस्पीकर। मुस्लिम मोहल्ले में बच्चे इस शोर से पढ़ नहीं पा रहे हैं। इस आक्रामकता के कारण दूसरे लोग चिढ़ते हैं और मुसलामानों की सही धार्मिकता के कारण आकर्षित भी होते हैं। भाई जैसे बहन की गुड़िया ले कर भागता है उसकी चुटिया काट देता है - ताक़त आकर्षण समझ पाने का कौतूहल। बादलों के पीछे एक रौशनी की लकीर भी है - हमलावर या तो स्वयं इस्लाम में आ जाएंगे या अपना धर्म भी सच्ची श्रद्धा से मानने लगेंगे। तो उनके स्वागत में दरवाज़े खोल दीजिये पेय जल और शर्बत की व्यवस्था करिये उनके त्योहारों में आप भी मस्जिद के बाहर सबील लंगर लगा दीजिये उन्हें अच्छा हिन्दू बनने का प्रोत्साहन दीजिये। यह भी सच है आम हिन्दू हमले नहीं कर रहा है पैसा और दारू पीला कर कुछ लोगों से बेरोज़गार अशिक्षित युवकों से ऐसा कराया जा रहा है। 14...

जब तक मुसलमान ज़मीनी हक़ीक़त को समझेंगे नहीं निराश हताश रहेंगे या उससे बचने के लिए कट्टरवाद आतंकवाद की तरफ प्रेरित होंगे

1947 में देश आज़ाद हुआ और विभाजित हुआ और क़ाएदे आज़म इतनी बड़ी बेक़ाअइदगी पर राज़ी हुए कि एक पाकिस्तान पश्चिम में और एक पाकिस्तान पूरब में शायद ही कोई अक़्लमंद इंसान इस पर राज़ी होता। हिन्दुस्तान के बहुसंख्यक मुसलामानों के वे नेता थे भी नहीं। शायद उन्होंने यह सोचा था मुस्लिम बाहुल्य पंजाब और बंगाल में मुसलमान राज्य सरकार चलाएंगे और शेष जगह हिन्दुओं की राज्य सरकारें होंगी और दोनों ब्रिटैन के आधीन होंगे। मुसलामानों की बड़ी आबादी नहीं गयी इसलिए उनकी आबादी के लिहाज़ से भूमि हिन्दुस्तान को मिली - अगर सारे मुसलमान चले जाते तो पाकिस्तान थोड़ा बड़ा होता हिन्दुस्तान थोड़ा छोटा होता। मुसलमान चले जाते तो क्या होता - शायद जातीय युद्ध होते शायद ऊंची जाति के लोग सत्ता में रहने के लिए तानाशाही स्थापित करते या सैन्य शासन होता। बहरहाल मुसलमान रहे और देश प्रजातंत्र और सेक्युलरिज़्म को ले कर दुनिया में सर बुलंद हुआ। पढ़े लिखे उच्च पद के मुसलमान पाकिस्तान चले गए और यहाँ रिक्त स्थानों पर जो पढ़े लिखे लोग थे यानी उच्च जाति के लोग वे हर पद पर आते गए। मुसलमान मौलवियों के अनुयायी बन गए अपने पढ़े लिखों को कुछ समझा ही न...

A World without Borders where everyone has equal opportunities

Blue print of a new world order The whole world can be organized in more effective way into 10 regions. 1. Each Region of 1000,000,000 people and divided into 10 sectors 2. Each Sector of 100,000,000 people and divided into 10 provinces. 3. Each Province of 10,000,000 people and divided into 10 districts. 4. Each District having 1000.000 people Following Departments at each level from District to the World level can care all social needs – 1) Food for All 1. Water for All 2. Clothing for All 3. Housing for All 4. Health for All 5. Energy for All 6. Transport for All 7. Communication for All 8. Security for All 9. Environment for All 10. Law & Justice for All 11. Education for All 12. Recreation for All Each child will be free to join Department of his/her choice and interest. The Education and Training will be provided to each child through Department in the following way 1. Common Education through Education Department up to age of 17 years 2. Next 3 Years: Learning...

दुनिया भर में हिंसा के पीछे कौन ?

चाहे युद्ध हों या आतंकवादी हिंसा या अलगाववादी हिंसा या साम्प्रदायिक हिंसा या जातीय हिंसा या नस्ली हिंसा नर संहार - सबके पीछे वह कौन हैं जिन्हें कोई जानता नहीं जिन तक किसी हिंसा किसी आग की लपट पहुँच नहीं सकती ? पुलिस सेना राष्ट्र अध्यक्ष सब हिंसा का शिकार हो सकते हैं पर वे अदृश्य दौलत के मालिक हर हिंसा से अछूते हैं : The top 10 richest families in 2021 by estimated wealth are: • The Waltons with $238 billion. • The Mars family with $142 billion. • The Kochs with $124 billion. • The Hermès family with $112 billion. • The Sauds with $100 billion. • The Ambanis with $94 billion. • The Wertheimers with $62 billion. • The Johnsons with $61 billion. https://www.google.com/search?q=top+richest+households+in+the+world+2021&oq=Top+richest+households+&aqs=chrome.3.69i57j33i160l5.28300j0j15&sourceid=chrome&ie=UTF-8 यह सिर्फ बंदूक गोली बम ही नहीं बना कर बेच रहे हैं और सप्लाई कर रहे हैं यह हिंसक संगठनों को फण्ड भी करते हैं नफरत फैलाने वाली पार्टियों को सत्ता पर बिठाते भी हैं। एक नय...

हिन्दू -मुस्लिम असली विवाद क्या है ?

जो शिक्षित खुशहाल हिन्दू सऊदी अरब , ईरान या अन्य मुस्लिम देशों में जा चुके हैं और काम कर रहे हैं वे वहाँ धर्म की शान देख कर और यह देख कर कि अन्य धर्म वालों को अपना धर्म प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है वैसा ही वे भारत में चाहते हैं कि यहां मुसलामानों को धार्मिक स्वतन्त्रता नहीं होनी चाहिए और इसी लिए मस्जिदों मज़ारों पर हमले या उन पर भगवा लगाना या मुस्लिम मोहल्लों में मुस्लिम विरोधी नारे लगाना जैसी घटनायें हो रही है करवाई जा रही हैं वैसे शायद मुस्लिम देशों में भी अब मंदिर बने हैं और पाकिस्तान में भी हिन्दुओं को काफी आज़ादी है। दुनिया को अगर आगे बढ़ना है तो इस्लामिक देशों में औरों को आज़ादी अधिकार देने होंगे शरीयत के क़ानून हटाने होंगे और universal declaration of human rights को लागू करना होगा। राम नवमी के जुलूस पर डी जे और नारों के विरोध में मुसलामानों द्वारा पत्थरबाज़ी की गयी तो उन्हें सबक़ सिखाने के लिए उनके मकान ढह दिए गए। जब वरिष्ठ पत्रकार सौरभ शर्मा ने रात एक बजे डी जे बंद करवाने को कहा तो उसी उग्र भीड़ ने उन्हें लिंचिंग के लिए दौड़ाया और उनकी पत्नी को नंगा करके घुमाने की धमकी दी। आंख...

ज़रुरत किस बात की ?

ज़रुरत किस बात की ? हम सब की आंखें खुल जानी चाहिए कि हमें राजनीतिज्ञों और धर्म गुरुओं से कुछ हासिल नहीं होना - देश में जो लोग अनुवांशिक सामाजिक असमानता स्थापित किये हुए थे उन्हें पिछले तीन चार दशक में उभर कर आने वाले जातिवादी राजनीतिज्ञों से बहुत बड़ा खतरा दिखने लगा - अगर 70 प्रतिशत लोग जातिवादी नेतृत्व के तले आ गए तो क्या होगा ? इसलिए देश में साम्प्रदायिकता और एंटी -सेकुलरिज्म की आंधी लायी गयी जिससे यह आशा की जा रही है कि वे 70 प्रतिशत आम लोग उन्हीं साम्प्रदायिक एंटी -सेक्युलर शक्तियों के अधीन बने रहेंगे। एक सुनियोजित रणनीति के तहत साम्प्रदायिक संविधान विरोधी अवैज्ञानिक बयान कभी कहीं कोई संत देता है कभी कोई साध्वी कभी कोई सी एम कभी कोई डी एम और कभी कोई अदालत अपने फैसले में ऐसी टिप्पणी कर देता है। इन साम्प्रदायिक एंटी-सेक्युलर शक्तियों को ओवैसी जैसे लोग और वे मौलाना जो यू ट्यूब पर वीडियो डाल रहे हैं जिसमें गज़वा हिन्द और पूरे भारत को इस्लाम में आ जाने की भविष्यवाणियां कर रहे हैं पूरा लाभ पहुंचा रहे हैं। मुस्लिम देशों का 1400 वर्षों पुराना इतिहास क्या काफी नहीं है बताने के लिए कि मुस्...

सभ्यता का सफर : एक रिव्यु

इस धरती पर हमारी प्रजाति का अस्तित्व दो तरह के लोगों से है - एक वे जो अपने शारीरिक श्रम से उत्पादन कर रहे हैं जैसे कि किसान , मज़दूर और जो लोग जंगल नदियों सागर और भू गर्भ से ज़रुरत की चीज़ें लाते हैं। दूसरे वे लोग जो अपने मानसिक प्रयासों से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं विज्ञान और टेक्नोलॉजी में नए नए विकास कर रहे हैं और दूसरों को शिक्षित प्रशिक्षित कर रहे हैं। वे करोड़ों लोग जो दुनिया में कृषि उत्पादन कर रहे हैं या जिन्होंने सड़कों , पुलों और भवनों का निर्माण किया उनमें अधिकाँश को दासता में जकड़ा गया था , करोड़ों को नीच बनाया गया और दुनिया भर में यही लोग शुद्ध जल , शुद्ध वायु और पर्याप्त भोजन और उपचार से वंचित हैं टी बी जैसे रोग से ग्रसित हैं और वे और उनके बच्चे दस्त और निमोनिया जैसे रोगों से मरते रहते हैं और इनकी औरतें गर्भवती और प्रसव के दौरान मरती रहती हैं। और जो सिर्फ चालाकी करते हैं - राजा , राष्ट्रपति , प्रधान मंत्री या तानाशाह और जो पुरोहित या धर्माधिकारी हैं और जो व्यापारी उद्योगपति पूंजीपति हैं बेहतरीन शुद्ध जल , वायु , पौष्टिक भोजन और बेहतरीन उपचार पाते हैं और फिर यह एक इरादा करते हैं ...