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नर संहार और भय

यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि घृणा के पीछे भय होता है भय होता है अपनी पहचान छिन जाने का भय होता है आबादी बढ़ा कर जो आज अल्प संख्यक हैं बहु संख्यक हो जाएंगे भय होता है हमारी औरतों का बलात्कार करेंगे या लव जिहाद करेंगे भय होता है हमारा जबरी धर्म परिवर्तन कर देंगे मुस्लिम राष्ट्र बना देंगे यह स्वाभाविक भय हैं और जब एक संगठन जो हिटलर के रास्ते चलता है तो इतिहास की कुछ वास्तविक या मन गढ़ंत बातों को ले कर आम लोगों में नफरत फैलाता है जबकि सद्बुद्धि यह कहती है भला आज के यह लोग उन बातों के लिए कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं। फिर कोई घटना घटित होने के बाद अल्प संख्यक समाज पर इल्ज़ाम लगा कर नर संहार शुरू हो जाता है हालांकि यह उसी संगठन की ही साज़िश हो सकती है - जैसे कि गोधरा काण्ड - अगर कुछ आपराधिक मुसलामानों ने यह जघन्य अपराध किया भी था तो उसके लिए आम मुसलमान कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं ? या किसी लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना चिंगारी का काम कर सकती है। अल्प संख्यक समाज क्या करे ? अल्प संख्यक समाज को सब्र के साथ शिक्षा और रोज़गार में आगे बढ़ना चाहिए। अपने अंदर से कट्टरवाद निकालना चाहिए - राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों - कला साहित्य संगीत स्पोर्ट्स में आगे बढ़ना चाहिए। परोपकार के काम करना चाहिए बिना धर्म जाति देखे विधवा अनाथ विकलांग वृद्ध की सहायता के उपाय करना चाहिए अपने संस्थानों में उम्दा सस्ता इलाज और शिक्षा प्रदान करना चाहिए और ज़रूरत मंद को बिना धर्म जाति देखे नि : शुल्क सहायता करनी चाहिए। सबील लगानी चाहिए और लंगर लगाना चाहिए सिर्फ अपने ही नहीं दूसरों के भी त्योहारों पर भी। जो धर्म गुरु और लीडर कट्टरवाद बढ़ायें और लड़ने मुक़ाबले की बात करें उनका बॉयकॉट करें। अब असली बात समझने की ज़रुरत है - जो शासन में हैं प्रशासन में हैं उच्च अधिकारी हैं पुलिस अधिकारी हैं मिलिट्री अधिकारी हैं जज हैं मीडिया के लोग हैं और जो पूंजीपति और उद्योगपति हैं क्या उन्हें मुसलमान से खतरा है ? वे तो पूर्णत: सुरक्षित हैं लेकिन नफरत फैलाने दंगा कराने गुंडों को सुरक्षा देने और बरी करने में वही हैं। उन्हें खतरा किस से है ? उन्हें खतरा है जातीय राजनीति से उन्हें खतरा है ओ बी सी और दलित के सत्ता में आ जाने का। हालाँकि बात समझने की यह है क्या किसी देश में चुनाव जीत कर कोई कम्युनिस्ट पार्टी कम्युनिज्म ला सकती है ? क्या बराक ओबामा राष्ट्रपति बन कर श्वेत अश्वेत समीकरण बदल सके ? हमारे देश में खतरा है मुसलामानों दलितों और आदिवासियों के नर संहार का। यह नर संहार शासन प्रशासन पुलिस के संरक्षण में होता है और अपराधियों को बरी करने का काम जुडिशरी करती है। रास्ता - मुसलमान दलित या आदिवासी बने रहने में नहीं है। रास्ता है हिन्दू मुस्लिम ओ बी सी दलित आदिवासी सभी इंसान बन जायें या देश के अंदर भारतीय इंडियन बन जायें। हम सबको चाहिए एक नया नाम रखें - अपना नाम + अपनी माता का नाम + अपने पिता का नाम बस। हम एक क़दम और बढ़ सकते हैं और इस नाम से vowels निकाल कर पुन : a e i o u के कर्म में vowels डाल दें और इस तरह न धर्म न जाति। मेरा नाम नेट पर यही है manesiro shaheri maretizo हिन्दू मुस्लिम विवाह में एक शर्त यह होनी चाहिए कि विवाह के लिए पहले या बाद कोई धर्म परिवर्तन अनुमन्य नहीं होगा। संतान माँ के धर्म पर होगी। तलाक़ अनुमन्य नहीं होगा या कम से कम 25 लाख हर्जाना लड़की को देना होगा जो उच्च वर्ग में जैसे कि शाह फ़ैसल और आमिर खान जैसे लोगों में करोड़ों का होना चाहिए। आबादी का अनुपात बना रहना चाहिए यह भय नहीं होना चाहिए की किसी भी क्षेत्र में अल्प संख्यक आबादी बढ़ा कर बहुसंख्यक हो जाएंगे।

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