भारत में 5000 वर्षों से जन्म के आधार पर ऊंच नीच क़ायम की गयी थी। जो यहां पहले से बसे लोग थे वे खेती और पशु पालन करते थे पर उन्हें आत्म रक्षा की समझ नहीं थी उस काल के अवशेषों में कोई तलवार या आत्म रक्षा का हथियार नहीं मिलता है। बाद में कुछ लोग रथ और तलवारों के साथ आये यहां के लोगों को मारा क़त्ल किया - कुछ पहाड़ पर कुछ जंगलों में और कुछ दक्षिण भाग गए। बाक़ी को आने वाले जो आर्य कहलाये ने अपना गुलाम बना लिया। आर्य और अनार्य दो वर्ग हो गए। आर्यों में तीन वर्ग थे ब्रह्मण क्षत्रिय और वैश्य - आम बोलचाल में अब इन्हें पंडित ठाकुर और बनिया कहा जाता है। अनार्यों को शूद्र कहा गया जिनका काम आर्यों की सेवा करना था। जिनको बहुत घटिया काम जैसे कि मैला ढोना सूअर पालना मरे जानवरों की खाल निकालना काम था उन्हें चण्डाल कहा गया और उन्हें नगर की सीमा से बाहर ही रहने की अनुमति थी। जो पहाड़ों जंगलों में भाग गए वे आदिवासी हो गए और जो दक्षिण भाग गए वे द्रविड़ हो गए। आर्य मात्र 5 प्रतिशत और अनार्य 95 प्रतिशत थे पर आर्य अपने बल शस्त्र और क्रूरता से शक्तिशाली थे। क़ुरान कहता है सारे इंसान एक माँ बाप की औलाद हैं औ...