जब तक मुसलमान ज़मीनी हक़ीक़त को समझेंगे नहीं निराश हताश रहेंगे या उससे बचने के लिए कट्टरवाद आतंकवाद की तरफ प्रेरित होंगे
1947 में देश आज़ाद हुआ और विभाजित हुआ और क़ाएदे आज़म इतनी बड़ी बेक़ाअइदगी पर राज़ी हुए कि एक पाकिस्तान पश्चिम में और एक पाकिस्तान पूरब में शायद ही कोई अक़्लमंद इंसान इस पर राज़ी होता। हिन्दुस्तान के बहुसंख्यक मुसलामानों के वे नेता थे भी नहीं। शायद उन्होंने यह सोचा था मुस्लिम बाहुल्य पंजाब और बंगाल में मुसलमान राज्य सरकार चलाएंगे और शेष जगह हिन्दुओं की राज्य सरकारें होंगी और दोनों ब्रिटैन के आधीन होंगे।
मुसलामानों की बड़ी आबादी नहीं गयी इसलिए उनकी आबादी के लिहाज़ से भूमि हिन्दुस्तान को मिली - अगर सारे मुसलमान चले जाते तो पाकिस्तान थोड़ा बड़ा होता हिन्दुस्तान थोड़ा छोटा होता।
मुसलमान चले जाते तो क्या होता - शायद जातीय युद्ध होते शायद ऊंची जाति के लोग सत्ता में रहने के लिए तानाशाही स्थापित करते या सैन्य शासन होता।
बहरहाल मुसलमान रहे और देश प्रजातंत्र और सेक्युलरिज़्म को ले कर दुनिया में सर बुलंद हुआ।
पढ़े लिखे उच्च पद के मुसलमान पाकिस्तान चले गए और यहाँ रिक्त स्थानों पर जो पढ़े लिखे लोग थे यानी उच्च जाति के लोग वे हर पद पर आते गए।
मुसलमान मौलवियों के अनुयायी बन गए अपने पढ़े लिखों को कुछ समझा ही नहीं और धीरे धीरे पढ़े लिखे भी मौलवियों के अनुयायी हो गए। कांग्रेस में भी वही लोग बड़ी दाढ़ी कुर्ते पयजामे वालों को ही टिकट दिए।
मिडिल ईस्ट में नौकरी मिलनी शुरू हुयी मुस्लिम घरों में पैसा आने लगा वहाँ से कैमरे म्यूजिक सिस्टम आने लगे और कट्टरवाद बढ़ा। बात कुछ भी नहीं थी लेकिन शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुसलामानों को मौलवियों ने शायद सऊदी पैसा प् कर सड़क पर उतार दिया - हम शरीयत में कोई मदाखलत हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेंगे ! आज कहाँ है वे मौलवी ?
राजीव गाँधी को झुकना पड़ा संविधान संशोधन कर दिया और उधर अरुण नेहरू निर्मल खत्री के ज़रिये कोर्ट आर्डर से बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा दिया और यह भी कहा मुसलामानों को शाह बानो केस का यह जवाब है !
शिला न्यास तक करा दिया। वी पी सिंह ने उन्हें दांव दिया और सत्ता में आ कर मंडल कमीशन लागू कर दिया।
ऊंची जाति के बच्चे आरक्षण के विरुद्ध आत्म दहन करने लगे।
राजीव गाँधी को आडवाणी ने दांव दिया और राम मंदिर निर्माण में रथ यात्रा निकाली। राजीव गाँधी हत्या से उनके सपने टूटे कांग्रेस फिर सत्ता में आ गयी इधर बाबरी मस्जिद टूटी मुसलमान मुलायम सिंह यादव के समर्थन में आ गए।
इस पृष्ठ भूमि में आम हिन्दू ने भाजपा का हाथ थामा - जातिवादी राजनीति को शिकस्त देने के लिए साम्प्रदायिकता का रास्ता चुना - ओ बी सी और दलित भाजपा समर्थक हो गए।
मुसलामानों को समझना चाहिए न जाति सही है और न जातिवादी राजनीति।
एक सुनियोजित रणनीति के तहत साम्प्रदायिक संविधान विरोधी अवैज्ञानिक बयान कभी कहीं कोई संत देता है कभी कोई साध्वी कभी कोई सी एम कभी कोई डी एम और कभी कोई अदालत अपने फैसले में ऐसी टिप्पणी कर देता है।
इन साम्प्रदायिक एंटी-सेक्युलर शक्तियों को ओवैसी जैसे लोग और वे मौलाना जो यू ट्यूब पर वीडियो डाल रहे हैं जिसमें गज़वा हिन्द और पूरे भारत को इस्लाम में आ जाने की भविष्यवाणियां कर रहे हैं पूरा लाभ पहुंचा रहे हैं।
मुस्लिम देशों का 1400 वर्षों पुराना इतिहास क्या काफी नहीं है बताने के लिए कि मुस्लिम देशों में न कोई आज़ादी है न कोई अधिकार कोई औरत किसी इस्लामिक देश में बिना न महरम के घर के बाहर निकल नहीं सकती।
कौन चाहेगा हमारा प्यारा देश ऐसा हो जाए ?
जातिवाद के सही हल की ज़रुरत है न कि सम्प्रदायिकता और नर संहार की बात करने के।
हम सबको चाहिए एक नया नाम रखें - अपना नाम + अपनी माता का नाम + अपने पिता का नाम बस।
हम एक क़दम और बढ़ सकते हैं और इस नाम से vowels निकाल कर पुन : a e i o u के कर्म में vowels डाल दें और इस तरह न धर्म न जाति। मेरा नाम नेट पर यही है manesiro shaheri maretizo
हिन्दू मुस्लिम विवाह में एक शर्त यह होनी चाहिए कि विवाह के लिए पहले या बाद कोई धर्म परिवर्तन अनुमन्य नहीं होगा। संतान माँ के धर्म पर होगी। तलाक़ अनुमन्य नहीं होगा या कम से कम 25 लाख हर्जाना लड़की को देना होगा जो उच्च वर्ग में जैसे कि शाह फ़ैसल और आमिर खान जैसे लोगों में करोड़ों का होना चाहिए।
आबादी का अनुपात बना रहना चाहिए यह भय नहीं होना चाहिए की किसी भी क्षेत्र में अल्प संख्यक आबादी बढ़ा कर बहुसंख्यक हो जाएंगे।
धर्म और जाति के स्थान पर इंडियन भारतीय या हिन्दुस्तानी लिखना मान्य होना चाहिए - मुस्लिम देशों में हम अपने को हिंदी बताते हैं और हिंदी ही वह लोग कहते हैं। हिंदी और हिन्दू एक दूसरे के पर्यायवाची समझे जाने चाहिए और किसी को इससे कोई वास्ता नहीं होना चाहिए वह क्या अपने घर में करता है।
मुसलामानों को सिर्फ कांग्रेस को वोट देना चाहिए और एक दिन शिक्षित हिन्दू भी साम्प्रदायिकता को रिजेक्ट कर के कांग्रेस में आ जाएंगे और देश फिर सही ट्रैक पर आ जाएगा और आर्थिक रूप से संपन्न हो जाएगा।
मुसलमानो को धार्मिकता छोड़ कर सारा ध्यान शिक्षा और रोज़गार में लगाना चाहिए और हिन्दुओं के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाये रखने चाहिए।
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