हम सबको चाहिए एक नया नाम रखें - अपना नाम + अपनी माता का नाम + अपने पिता का नाम बस।
हम एक क़दम और बढ़ सकते हैं और इस नाम से vowels निकाल कर पुन : a e i o u के कर्म में vowels डाल दें और इस तरह न धर्म न जाति। मेरा नाम नेट पर यही है manesiro shaheri maretizo
जन दिवस - दुनिया भर में एक दिन !
सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं।
इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है !
इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है।
दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है कहीं कोई तानाशाह कहीं कोई कम्युनिस्ट कहीं कोई मुल्ला - आज की दुनिया ऐसे नहीं छोड़ी जा सकती - कोई किसी का आंतरिक मामला नहीं है - हर जगह प्रजातंत्र होना चाहिए और हर जगह चुनाव सिस्टम और प्रोसेस पर पूरी दुनिया की नज़र होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक जुट होने की ज़रूरत है।
वर्ष में एक दिन जन दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए जिस दिन दुनिया के हर शहर में सारे स्त्री पुरुष घरों से निकलें और मार्च करते हुए एक केंद्रीय स्थल पर जायें और घोषणा करें हम शासक हैं और हम सब बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं।
हमें चाहिए धन संपत्ति और सत्ता के झूठ से अपने को मुक्त कर लें। इस धरती पर जो कुछ है वह सबका है मानव ने जो कुछ खोजा है पाया है उसमें सबका योगदान है। पहली पीढ़ी जिसमें मान लें 70 लड़के 70 लड़कियां थे तो आज के 7 अरब मानव उन्हीं की संतान हैं। पितृ सत्ता स्थापित होने के बाद पुरुष प्रधान समाज के 5 से 10 प्रतिशत लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत लालची और कायर लोगों को अपने में मिला कर शेष सीधे सादे लोगों को वंचित रखा और उनका हर प्रकार से शोषण किया।
सबसे पहले हमें निर्णय लेना है कि जीव जगत से मांस अंडा दूध लेने ले बजाय स्वयं बायोटेक्नोलॉजी से उच्च कोटि की प्रोटीन बनाएंगे और इस प्रकार कृत्रिम मांस अंडा और दूध जैसी अन्य चीज़ें बनाएंगे।
जब काम को नीचा और घटिया बना दिया गया :
मनुष्य ने अपनी सभ्यता के इतिहास में कुछ कामों को मामूली और कुछ को नीचा और घटिया समझा और यह सभी ज़रूरी काम करवाने के लिए अन्याय और चालाकी और जोर ज़बरदस्ती का सहारा लिया I
घर गृहस्ती के काम जैसे कि खाना पकाना, बर्तन धोना, कपड़े धोना और घर साफ़ रखना यह औरतों कि ज़िम्मेदारी बना दी गयी इसलिए उन्हें शिक्षा से वंचित रखा गया और आज्ञाकारी बना कर रखा गया I आज की टेक्नोलॉजी ने कुकर , फ्रिज , ओवन, कुकिंग गैस और टी वी , मोबाइल बना कर अब औरतों का जीवन आसान कर दिया है और अब पुरुष भी हाथ बंटाने लगे हैं I
नगर के कूड़े सफाई का काम , नाले सीवर का काम , सूअर और गाय भैंस पालना, मरे जानवर की खाल उतरना और उसका चमड़ा बनाना, मुर्दा जलाना , कब्र खोदना ऐसे कई काम हैं जिन्हें करने वालों से भी दूसरे लोगों को दूर रहने का मन करता है I
इसी सब के लिए जातियां बनायी गयी और उंच-नीच बनती गयी I
यह सभी काम ज़रूरी हैं और इनका न्याय सांगत हल सोचा जाना चाहिए था और टेक्नोलॉजी का विकास और उपयोग किया जाना था I
जैसे नगर की सफाई प्रतिदिन मजदूरी से होनी चाहिए और मजदूरी भी बहुत अच्छी होनी चाहिए और टेक्नोलॉजी और गैजेट्स प्रयोग में लाने चाहिए I इस तरह कोई भी युवक या युवती अपनी पहचान छुपाते हुए पूरा किट – ड्रेस , हेड कवर , गॉगल्स आदि लेकर यह काम कर सके और यह पार्ट टाइम काम होगा तथा जब भी उन्हें स्थाई इच्छाअनुसार कार्य मिले तो उसमे चले जाए I
रोज़गार बदलते रहने, आगे पढ़ते रहने और प्रशिक्षित होने के अवसर मिलते रहने चाहिए I
हर सामाजिक काम सम्मानजनक है और हर असामाजिक अपराधिक काम हेय है यह बच्चों को सिखाया जाना चाहिए I
हमें निर्णय लेना है कि पूरी दुनिया से भुखमरी को मिटाना है और पूरी दुनिया में पेयजल उपलब्ध कराना है। पूरी दुनिया से दासता और परतंत्रता खत्म करना है। हर बच्चा अपनी रूचि के क्षेत्र में निर्बाध बढ़ सके और हर युवक युवती आपसी रज़ामंदी से अपना जीवन साथी चुन सके।
नयी व्यवस्था - बॉर्डर विहीन दुनिया
पूरी दुनिया में लड़के लड़कियों की शिक्षा और रोज़गार प्रदान करने के लिए हमें विश्व को नए ढंग से व्यवस्थित करना होगा :
पूरे विश्व को 10 रीजन में बांटना होगा हर रीजन में एक अरब लोग 1000,000,000 होंगे
हर रीजन को 10 सेक्टर में बांटा जाएगा हर सेक्टर में दस करोड़ 100,000,000 लोग होंगे
हर सेक्टर को 10 प्रोविंस में बांटा जाएगा हर प्रोविंस में एक करोड़ 10,000,000 लोग होंगे।
हर प्रोविंस को 10 डिस्ट्रिक्ट में बांटा जाएगा और हर डिस्ट्रिक्ट में 1000.000 दस लाख लोग होंगे।
डिस्ट्रिक्ट से लेकर विश्व स्तर तक निम्नलिखित विभाग कार्य करेंगे :
1 सबके लिए भोजन
2 सबके लिए जल
3 सबके लिए वस्त्र
4 सबके लिए आवास
5 सबके लिए स्वास्थ्य
6 सबके लिए एनर्जी
7 सबके लिए यातायात
8 सबके लिए संचार संपर्क
9 सबके लिए सुरक्षा
10 सबके लिए न्याय
11 सबके लिए स्वस्थ वातावरण
12 सबके लिए शिक्षा
13 सबके लिए मनोरंजन
सभी लड़के लड़कियों को 17 वर्ष की आयु तक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षित किया जाएगा और 17 वर्ष की आयु तक लड़के लड़कियां अपनी रूचि का विभाग चुन लेंगे उनकी शेष शिक्षा और ट्रेनिंग चयनित विभाग द्वारा कराई जायेगी।
अगले तीन वर्ष तक हर लड़का लड़की अपने विभाग के लेवल 3 के काम का प्रशिक्षण प्राप्त करेगा और अपने विभाग के लेवल 4 का काम करेगा जिसमें प्रथम 6 महीने हर विभाग का हर लड़का लड़की वातावरण की स्वच्छता का काम करेगा - यह काम पूरे सुरक्षा किट को पहन कर करेगा। हर लड़के लड़की को कार्य का वेतन मिलेगा।
अगले 5 वर्ष हर लड़का लड़की अपने विभाग का लेवल 3 का काम करेगा और उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा। उसे अपने कार्य का वेतन मिलेगा।
स्वास्थ्य विभाग में प्रथम तीन वर्ष में हर लड़का लड़की वार्ड आया/ बॉय का काम करेगा और नर्सिंग / फार्मेसी / तकनीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त करेगा। अगले 5 वर्ष नर्स फार्मासिस्ट या तकनीशियन का काम करेगा और चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करेगा।
हर विभाग मानव जीवन के एक आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए कार्य करता है - यह वर्तमान में 13 आवश्यकताएं हैं। विश्व स्तर पर हर आवश्यकता के लिए एक ग्लोबल इंस्टिट्यूट होगी जो पूरी दुनिया के लिए रिसर्च डेवलप्मेंट प्लानिंग और इवैल्यूएशन करेगी। हर रीजन में एक और पूरी दुनिया में 10 रीजनल इंस्टिट्यूट होंगी। हर सेक्टर में एक और पूरी दुनिया में 100 सेक्टोरल इंस्टिट्यूट होंगी। हर प्रोविंस में एक और पूरी दुनिया में 1000 प्रोविंशियल इंस्टिट्यूट होंगी।
पूरी दुनिया में 10000 डिस्ट्रिक्ट होंगे और हर डिस्ट्रिक्ट में यह 13 विभाग काम करेंगे।
ऐसा हो सकता है कुछ लोग लेवल 4 से आगे न बढ़ सकें और आगे न बढ़ना चाहें - तीन वर्ष बाद उन्हें लेवल 3 के प्रशिक्षण की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और वे केवल 4 घंटे लेवल 4 का कार्य करके वेतन पाते रहेंगे और संतुष्ट जीवन जियेंगे। वर्ष में एक महीने का हरेक को अवकाश मिलेगा जिसमें घूमने फिरने मनोरंजन की व्यवस्था मनोरंजन विभाग करेगा।
इसी प्रकार हो सकता है कुछ लोग लेवल 3 से आगे न बढ़ सकें और आगे न बढ़ना चाहें - पांच वर्ष बाद उन्हें किसी उच्च शिक्षा व प्रशिक्षण की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और वे केवल 4 घंटे लेवल 3 का कार्य करके वेतन पाते रहेंगे और संतुष्ट जीवन जियेंगे। वर्ष में एक महीने का हरेक को अवकाश मिलेगा जिसमें घूमने फिरने मनोरंजन की व्यवस्था मनोरंजन विभाग करेगा।
जिनको आगे बढ़ने की रूचि और योग्यता होगी वही चिकित्स्क इंजीनियर प्रोग्रामर एडवोकेट जज आदि बनेंगे। जिनको रिसर्च डेवलपमेंट प्लानिंग की रूचि और योग्यता होगी वे डिस्ट्रिक्ट में 7 वर्ष काम करने के बाद प्रोविंस और फिर सेक्टर फिर रीजन फिर ग्लोबल इंस्टिट्यूट तक पहुँच सकेंगे।
Viewing things either as male or as female has distorted our perceptions. Only some living things are male and female and even such things require gender free word most of the times. For example a human being needs to be addressed by some common word but the common word ‘man’ has been taken by male of the species. The male has penis and female has womb- so woman is correct word for female of human species and accordingly male of human species must be called ‘peman’ while man should be used where there is no need to express gender. At microscopic level, the female gamete remains at one place and male gamete reaches it and gets attached. 1. Most harm has caused to our thinking and feelings by understanding God in male image. 2. Many things having nothing to do with sex dichotomy are understood as male or female- for example in Hindi palang is masculine while kursi and mez are feminine. 3. Even our emotions are treated as masculine or feminine for example pyaar is masculine and muhabbat ...
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