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सिकूलर अर्बन नक्सलों और क्या क्या, आप से सादर अनुरोध

आप जब भी किसी के अधिकारों का हनन होता है तो आप आवाज़ बुलंद करते हैं लिखते हैं अदालत जाते हैं और बदले में आप नफरत का शिकार होते हैं जेलों में बंद किये जाते हैं - सरकार किसी की रही हो कांग्रेस या भाजपा या बिहार में लालू रबड़ी या नीतेश कुमार की यही पिछले 75 वर्षों से हो रहा है। जब तक मरज़ समझा नहीं जाएगा इलाज हो न पायेगा। सत्ता में जो होता है वह बहुत असुरक्षित होता है और आप इस असुरक्षा को न महसूस कर पाते हैं क्यूंकि आप उच्च शिक्षित बुद्धिजीवी हैं और न ज़्यादा ध्यान देते हैं आप तो संविधान और क़ानून की तरफ देखते हैं। अमेरिका में रेड इंडियन जिन्हें अब नेटिव अमेरिकन कहा जाता है वे भी अपनी ज़मीन बचाने सुप्रीम कोर्ट वर्षों तक न्याय की उम्मीद में गए पर नतीजा क्या रहा ? बात गहरी है हम सबको बहुत कुछ समझना होगा बहुत कुछ छोड़ना होगा। आज के इस्लाम और आज के मुसलमान से मानव सभ्यता को खतरा है जिसका नमूना तालिबान और आई एस आई एस के रूप में सामने है। करोड़ों मुसलमान बेगुनाह हैं और ज़ुल्म का शिकार हैं लेकिन हर मुसलमान बच्चा यह जानता है उसे यह बताया गया है कि सिर्फ इस्लाम सही दीन है सिर्फ मुसलमान जन्नत में जाएंगे ...

My Family : Roots and Branches

Note: I have written following accounts as I came to know from my maternal grand father and my parents. The commonly known names and aliases are given here as I know. I request my family members to update the informations given here and also to send me on manesiro@gmail.com First Generation Afzal Ali ‘Shafa-ud-daula’ was physician to Wajid Ali Shah. Afzal Ali sahab was a very learned person and authored many books on Hikmat and also wrote a few on modern Medicine. He had many wives and so had many sons and daughters. Second Generation His children were Baqar , Safdar , Haider, Ghazanfar, Sayyada, Raziya, Ahmadi, one daughter Third Generation 1. Baqar Husain : He had a daughter known as Babbo phuphi 2. Safdar Husain 3. Haider Husain his children were Abul Hasan, Masood, Afzal, Zamin, Zaki, Abbas, Mashadi, Sajida, Ladli 4. Ghazanfar Husain died issueless 5. Sayyada Begum : married to Ghazanfar Husain then got separated Her children were Muzaffar Husain, Nadri Begum and Zakiya Beg...

शिक्षित मुसलामानों को जागने की ज़रूरत

आज के युग में यह समझना कि आसमान छत है और ज़मीन फर्श क्या उपयुक्त है और ऐसा समझने वाले मौलवियों का अनुसरण करना क्या समझदारी है ? अरबों खरबों गैलक्सी दूर दूर भाग रही हैं पृथ्वी का अस्तित्व तो इस विशाल सृष्टि में नगण्य सा है। क्या किसी क़बीले के पुरुषों को एक साथ क़त्ल करवा देना और स्त्री बच्चों को बंधक बना लेना आज की नैतिकता और क़ानून के अनुसार है ? तो नमाज़ रोज़ा हज ज़कात ज़रूर कीजिये पर 21 वीं शताब्दी की मुख्य धारा से जुड़िये। भारत में सत्ता सवर्ण हिन्दुओं के हाथ में है और इसे खतरा पिछड़ी जाति और दलित जाति की जातिवादी राजनीति से है इसलिए सवर्ण राजनीति सम्प्रदायिकता का कार्ड खेल रही है। यह समझना बहुत बड़ी भूल होगी कि चुनाव जीत कर सत्ता में मूलभूत परिवर्तन किया जा सकता है - ओबामा के राष्ट्रपति बन जाने से नीग्रो सत्ता में नहीं आ गए थे। आप को अपने को पिछड़ी दलित पार्टियों से अपने को अलग करने की ज़रूरत है और मुस्लिम पार्टियों से भी अपने को अलग करने की ज़रुरत है। न हमें जातिवाद चाहिए और न मुस्लिम कटटरवाद चाहिए। सिर्फ धर्म निरपेक्षता और समाजवाद के लिए वोट डालिये और खड़े होइए। हम सब बराबर हैं हम सब भा...

परलोक की बात छोड़िये , इस लोक का सत्य तो यह है !

हर देश में धर्म , नस्ल , जाति , भाषा आदि के आधार पर एक से अधिक समुदाय रहते हैं जो समुदाय बहुसंख्यक होता है वही अपने को धरती पुत्र कहता है जबकि सत्य यह है कोई भी कहीं भी हमेशा से नहीं रह रहा है। इसी बहुसंख्यक समुदाय के अंदर एक अत्यंत अल्प संख्यक गुट होता है उन परिवारों का जो आपस में जन्म और रिश्ते से जुड़े रहते हैं और जिन्होंने कालांतर में उस देश की सत्ता और संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर लिया होता है। यही परिवार और इनसे जुड़े लोगों को देश की हर व्यवस्था हर विभाग - शिक्षा , व्यवसाय , राजकीय सेवा , बैंकिंग , मीडिया , पुलिस , इंटेलिजेन्स , न्याय पालिका सेना हर जगह वर्जस्व प्राप्त हो जाता है। अपना वर्जस्व बनाये रखने के लिए और इनके अपने समुदाय के लोग अपना हक़ न मांगें उन्हें अपने आधीन बनाये रखने के लिए दूसरे किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और इस कमज़ोर वर्ग को हिंसा का शिकार बनाते हैं - हिटलर ने यहूदियों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को शिकार बनाया ताकि आम जर्मन नागरिक बेरोज़गारी और मंहगाई के खिलाफ एक जुट न हो जाए। पाकिस्तान में शियों को शिकार बनाया जा रहा है भारत में मुसलामानों को शिकार बना...

जन दिवस - दुनिया भर में एक दिन !

सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं। इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है ! इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है। दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है कहीं कोई तानाशाह कहीं कोई कम्युनिस्ट कहीं कोई मुल्ला - आज की दुनिया ऐसे नहीं छोड़ी जा सकती - कोई किसी का आंतरिक मामला नहीं है - हर जगह प्रजातंत्र होना चाहिए और हर जगह चुनाव सिस्टम और प्रोसेस पर पूरी दुनिया की नज़र होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक जुट होने की ज़रूरत है। वर्ष में एक दिन जन दिवस क...

किसी भी संगठित धर्म को न मानिये

न किसी थोपी गयी आस्था के भंवर में डूबिये न किसी के द्वारा गढ़े गए धर्म के जंजाल में फंसिए। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को देखिये और आज के म्यांमार और श्री लंका के बौद्धों को देखिये। कोई धर्म 5000 वर्ष पहले आया था कोई 2000 वर्ष पूर्व और कोई 1400 वर्ष पूर्व - समय के साथ शब्दों के अर्थ ही बदल जाते हैं - धार्मिक शिक्षाओं को आज की परिस्थितियों में ढालने की ज़रूरत है न कि आज 5000 /2000 / 1500 पूर्व का जीवन जीने की ज़रूरत है। परलोक के बारे में इस जीवन के बाद उस जीवन में और कोई चेतना है तो उसके बारे में अपनी धारणा स्वयं बनाइये। कोई ज़रूरत नहीं है किसी पुरुष किसी मनुष्य किसी राजा के रूप में उसे देखें। न ही इस भुलावे में रहें कि अगर हमारा अस्तित्व है तो हम ऐसे ही भौतिक शरीर में चिर युवा और सुंदरता के साथ रहेंगे खाये पिएंगे और यौन सुख प्राप्त करेंगे। संगठित धर्म उस समय की राजनीति थे - सीमित संसाधनों के साथ लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाया गया और सत्ता वर्ग ऐशो -इशरत का जीवन जीता रहा - ऐसा जीवन जो आम लोगों को धार्मिक बने रहने पर परलोक में मिलेगा। आज ज़रूरत है हम अपने को धर्म गुरुओं , धर्म पुस्तकों औ...

आस्था न हो , धर्म हो

आस्था के नाम पर यहूदियों , ईसाईयों और मुसलामानों ने लाखों करोड़ों बेगुनाह इंसानों को क़त्ल कर दिया - ओल्ड टेस्टामेंट में देखिये यहवह के मानने वालों ने शुरू में तो बॉल और अन्य उपासकों के मर्दों औरतों बच्चों को क़त्ल किया बार बार यहवह कह रहा है किसी को जीवित न छोड़ना और उनके जानवरों को भी जीवित न छोड़ना उनकी संपत्ति को भी जला कर राख कर देना। एक जगह जब इनके ही एक भाई ने कहीं से कुछ क़ीमती चीज़ उठा ली और छुपा ली तो उसके पूरे वंश को पत्थरों के ढेर में दबा दिया गया। अगली स्टेज में औरतों मर्दों बच्चों का तो संहार किया गया लेकिन सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा करने की यहवह ने अनुमति दे दी और अगली स्टेज में पुरुषों लड़कों को क़त्ल किया गया लेकिन संपत्ति औरतों और लड़कियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया - जो होता रहा सब यहवह के आदेश से जो यहूदियों को नबियों के ज़रिये पहुँचता था। ईसाईयों ने दूसरे धर्म के लोगों को तो लूटा क़त्ल किया सम्पत्ति से बेदखल किया अपनों में भी इन्क्विज़िशन में आस्था में विकृति मिलने वालों को मार डाला जला डाला जोअन ऑफ़ आर्क को भी जला कर मार डाला वैज्ञानिक ब्रूनो को भी जला कर मार डाला और कितनी औरतों को वि...