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परलोक की बात छोड़िये , इस लोक का सत्य तो यह है !

हर देश में धर्म , नस्ल , जाति , भाषा आदि के आधार पर एक से अधिक समुदाय रहते हैं जो समुदाय बहुसंख्यक होता है वही अपने को धरती पुत्र कहता है जबकि सत्य यह है कोई भी कहीं भी हमेशा से नहीं रह रहा है। इसी बहुसंख्यक समुदाय के अंदर एक अत्यंत अल्प संख्यक गुट होता है उन परिवारों का जो आपस में जन्म और रिश्ते से जुड़े रहते हैं और जिन्होंने कालांतर में उस देश की सत्ता और संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर लिया होता है। यही परिवार और इनसे जुड़े लोगों को देश की हर व्यवस्था हर विभाग - शिक्षा , व्यवसाय , राजकीय सेवा , बैंकिंग , मीडिया , पुलिस , इंटेलिजेन्स , न्याय पालिका सेना हर जगह वर्जस्व प्राप्त हो जाता है। अपना वर्जस्व बनाये रखने के लिए और इनके अपने समुदाय के लोग अपना हक़ न मांगें उन्हें अपने आधीन बनाये रखने के लिए दूसरे किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और इस कमज़ोर वर्ग को हिंसा का शिकार बनाते हैं - हिटलर ने यहूदियों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को शिकार बनाया ताकि आम जर्मन नागरिक बेरोज़गारी और मंहगाई के खिलाफ एक जुट न हो जाए। पाकिस्तान में शियों को शिकार बनाया जा रहा है भारत में मुसलामानों को शिकार बना...

जन दिवस - दुनिया भर में एक दिन !

सभ्यता के अपने सफर में हमने मुल्क बना लिए - मुल्क की हुकूमतों ने आम इंसान को निहत्था और कमज़ोर बना दिया। हुकूमत के पास पुलिस और सेना की ताक़त है और हर मुल्क में सत्तारूढ़ वर्ग का एक गुंडा संगठन है जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। यह तीनों मिला कर किसी देश में 5 प्रतिशत के आस पास ही हो सकते हैं। इस स्थिति में शासन को बार बार चेताने की ज़रूरत है कि असली शासक कौन है ! इसके लिए दुनिया भर के सभी नगरों में प्रमुख दिवसों पर एक समय जैसे कि दिन दो बजे किसी प्रमुख स्थान तक सभी स्त्रियों पुरुषों को मार्च करना चाहिए - मानव स्वतन्त्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है। दुनिया के हम सब लोग बराबर हैं आपस में भाई बहन हैं - आज की दुनिया में यह जो मुल्क बनें हैं कहीं कोई बादशाह बना बैठा है कहीं कोई तानाशाह कहीं कोई कम्युनिस्ट कहीं कोई मुल्ला - आज की दुनिया ऐसे नहीं छोड़ी जा सकती - कोई किसी का आंतरिक मामला नहीं है - हर जगह प्रजातंत्र होना चाहिए और हर जगह चुनाव सिस्टम और प्रोसेस पर पूरी दुनिया की नज़र होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक जुट होने की ज़रूरत है। वर्ष में एक दिन जन दिवस क...

किसी भी संगठित धर्म को न मानिये

न किसी थोपी गयी आस्था के भंवर में डूबिये न किसी के द्वारा गढ़े गए धर्म के जंजाल में फंसिए। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को देखिये और आज के म्यांमार और श्री लंका के बौद्धों को देखिये। कोई धर्म 5000 वर्ष पहले आया था कोई 2000 वर्ष पूर्व और कोई 1400 वर्ष पूर्व - समय के साथ शब्दों के अर्थ ही बदल जाते हैं - धार्मिक शिक्षाओं को आज की परिस्थितियों में ढालने की ज़रूरत है न कि आज 5000 /2000 / 1500 पूर्व का जीवन जीने की ज़रूरत है। परलोक के बारे में इस जीवन के बाद उस जीवन में और कोई चेतना है तो उसके बारे में अपनी धारणा स्वयं बनाइये। कोई ज़रूरत नहीं है किसी पुरुष किसी मनुष्य किसी राजा के रूप में उसे देखें। न ही इस भुलावे में रहें कि अगर हमारा अस्तित्व है तो हम ऐसे ही भौतिक शरीर में चिर युवा और सुंदरता के साथ रहेंगे खाये पिएंगे और यौन सुख प्राप्त करेंगे। संगठित धर्म उस समय की राजनीति थे - सीमित संसाधनों के साथ लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाया गया और सत्ता वर्ग ऐशो -इशरत का जीवन जीता रहा - ऐसा जीवन जो आम लोगों को धार्मिक बने रहने पर परलोक में मिलेगा। आज ज़रूरत है हम अपने को धर्म गुरुओं , धर्म पुस्तकों औ...

आस्था न हो , धर्म हो

आस्था के नाम पर यहूदियों , ईसाईयों और मुसलामानों ने लाखों करोड़ों बेगुनाह इंसानों को क़त्ल कर दिया - ओल्ड टेस्टामेंट में देखिये यहवह के मानने वालों ने शुरू में तो बॉल और अन्य उपासकों के मर्दों औरतों बच्चों को क़त्ल किया बार बार यहवह कह रहा है किसी को जीवित न छोड़ना और उनके जानवरों को भी जीवित न छोड़ना उनकी संपत्ति को भी जला कर राख कर देना। एक जगह जब इनके ही एक भाई ने कहीं से कुछ क़ीमती चीज़ उठा ली और छुपा ली तो उसके पूरे वंश को पत्थरों के ढेर में दबा दिया गया। अगली स्टेज में औरतों मर्दों बच्चों का तो संहार किया गया लेकिन सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा करने की यहवह ने अनुमति दे दी और अगली स्टेज में पुरुषों लड़कों को क़त्ल किया गया लेकिन संपत्ति औरतों और लड़कियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया - जो होता रहा सब यहवह के आदेश से जो यहूदियों को नबियों के ज़रिये पहुँचता था। ईसाईयों ने दूसरे धर्म के लोगों को तो लूटा क़त्ल किया सम्पत्ति से बेदखल किया अपनों में भी इन्क्विज़िशन में आस्था में विकृति मिलने वालों को मार डाला जला डाला जोअन ऑफ़ आर्क को भी जला कर मार डाला वैज्ञानिक ब्रूनो को भी जला कर मार डाला और कितनी औरतों को वि...

आज 1400 वर्षों बाद

आज हम कह सकते हैं कि अल्लाह हो या न हो , मुहम्मद अल्लाह के रसूल हों न हों , फैसले का दिन हो न हो , जन्नत जहन्नम हो न हो हमें ज़िन्दगी भर नेकी के रास्ते चलना है बराबरी भाईचारा और अमन क़ायम करना है। 1400 वर्ष पूर्व अरब के पुरुष प्रधान क़बायली समाज में लोगों को नेकी की राह चलाने के लिए हज़रत मुहम्मद ने फैसले के दिन ईमान लाने पर ज़ोर दिया - अल्लाह है और वह अल्लाह के रसूल हैं यह मुख्य बात नहीं थी - फ़ैसले के दिन सतकर्म करने वालों को हमेशा के लिए जन्नत के बाग़ मिलेंगे और दुष्कर्म करने वालों को जहन्नम की आग मिलेगी - यह मुख्य धारणा दी गयी। भारत में महात्मा बुद्ध ने सिर्फ मोक्ष की बात कही किसी आस्था की अलग से बात नहीं कही। दुनिया भर में करोड़ों अरबों आम मुसलमान इन 1400 वर्षों में नेक ज़िन्दगी जी रहे हैं और इनके 5 गुना इंसान जो मुस्लिम नहीं हैं वे भी नेक ज़िंदगी जी रहे हैं। देखना यह है कि जो मुसलामानों में ख़ास इंसान थे उन पर इस ईमान का क्या प्रभाव पड़ा ? जब हज़रत मुहम्मद का आखिरी समय आया : बिलकुल अंत समय में जब ज़ोर ज़ोर से विवाद चल रहा था तो हज़रत मुहम्मद ने कहा कागज़ क़लम लाओ में वसीयत लिख दूँ तो उमर ने क...

मुसलमान आज भी क़बीला - युग में

जंगल में ही और जंगल से निकल कर खाना बदोश स्टेज में हम क़बीले के रूप में रहते थे और आज भी जब कोई शादी वगैरा होती है और सारे परिवार इकट्ठे होते हैं तो परिवार पिघल जाते हैं क़बीला बन जाता है - मर्द मर्द एक साथ औरतें औरतें एक साथ बच्चे बच्चे एक साथ। क़बीले में सब लोग सरदार की बात मानते हैं अपने विवेक को पीछे कर देते हैं। दुनिया के अधिकाँश लोग व्यक्ति बन कर रह रहे हैं हर बात खुद सोचते समझते हैं लेकिन अधिकाँश मुसलमान व्यक्तित्व विहीन हैं - मुसलामानों के सरदार हज़रत मुहम्मद हैं - क़ुरान उनसे मिला और उसके इलावा उन्होंने जो कहा जो किया उसे हदीस कहते हैं - सारे मुसलमान उसको मानते हैं या उसी को उद्धरित करते हैं करें चाहे कुछ भी। उनके बाद प्रथम तीन खलीफा जिन्होंने इस्लाम को हाईजैक किया वे सुन्नी मुसलमानों के सरदार हैं और हज़रत मुहम्मद के वंशज 12 इमाम शिया मुसलामानों के सरदार हैं। वक़्त के हिसाब से सुन्नी और शिया मौलवी हदीसें बयान करते हैं या गढ़ते हैं और मुसलमान उनके अनुसार अनुपालन करते हैं या उन्हें उद्धरित करते हैं - सोशल मीडिया पर लगातार यही चल रहा। ब्रिटिश काल के अंतिम समय में काफी मुसलमान प्...

विवादित स्थलों पर फैसला

जितने भी देश में विवादित स्थल हैं उन पर एक जुडिशियल कमीशन बना कर फैसला करा लिया जाए। लेकिन संघ द्वारा इसके बाद भी मुस्लिम समुदाय को चैन से रहने नहीं दिया जाएगा क्यूंकि असली रोग कुछ और है जिसका ज़िक्र और इलाज बाद में बताऊंगा। हिन्दू मुस्लिम विवाद कि मुख्य वजह दोनों की मानसिक परतंत्रता है - दोनों में अधिकतम लोगों के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं हुआ है और अगर यह अपना रोग पहचान कर अपने को ठीक नहीं करते तो विकास के सिद्धांत से इन दोनों का धरती से उठ जाना ही मानव जाति के हित में होगा - किसी प्राकृतिक आपदा द्वारा महाविनाश। वैसे तो पूरी मानव जाति महाविनाश के कगार पर पहुँच चुकी है किन्तु हर देश में अनेक स्त्री पुरुष ऐसे हैं जिनका अस्तित्व मानव जाति और प्रकृति के लिए उपयुक्त है। मुसलमान अपनी मानसिक परतंत्रता के कारण कट्टरवादी है और वह उनको अनुसरण करता है जो उसे कटटर बनाते जा रहे हैं - अनेक मौलवी और अनेक शिक्षित स्त्री पुरुष जो सोशल मीडिया पर धार्मिकता को बढ़ावा दे रहे हैं। हिन्दू अपनी मानसिकता परतंत्रता के कारण मुस्लिम दुश्मन और जातिवादी हैं - उनकी मुस्लिम दुश्मनी संघ और उससे जुड़े साधु साध्व...